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गुरुकुलीय संस्कृति का विस्तार करें छात्राएं : बालकृष्ण

Wed, 01 Jan 2025 02:20 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
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रजबपुर (अमरोहा)। श्रीमद् दयानंद कन्या गुरुकुल महाविद्यालय चोटीपुरा की संस्थापक आचार्या डॉ. सुमेधा के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित शास्त्र स्पर्धा में दूसरे दिन पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के आचार्य बालकृष्ण पहुंचे। उन्होंने कहा कि गुरुकुलीय संस्कृति में रहकर अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं को अवश्य इस संस्कृति को आगे बढ़ाना चाहिए।
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शास्त्र स्पर्धा के दूसरे दिन महाविद्यालय में कई कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए आचार्य बालकृष्ण ने छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
कहा कि गुरुकुलीय संस्कृति में रहकर अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं को इस संस्कृति का विस्तार करने को आगे आना चाहिए। उन्होंने गुरुकुल की पूर्व छात्राओं को भी भविष्य में सदैव गुरुकुल से जुड़कर कार्य करने को कहा। उन्होंने बालिकाओं के कला कौशल व समय-समय पर प्राप्त करने वाली उपलब्धियों की भी प्रशंसा की। कहा कि गुरुकुल चोटीपुरा इस समय देश भर में सर्वश्रेष्ठ व अनुकरणीय शिक्षण संस्थानों में एक है।
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उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति दिनेश चंद्र शास्त्री ने कहा कि गुरुकुलीय शिक्षा हमें संगठन तथा बल प्रदान करती है। स्वामी दयानंद सरस्वती के द्वारा प्रदत्त विचारधारा के आधार पर स्वामी श्रद्धानंद द्वारा स्थापित गुरुकुलीय परंपरा का प्रतिरूप आचार्या डॉ. सुमेधा में दिखाई देता है।
सोशल मीडिया के माध्यम से अपने श्रोताओं में सांस्कृतिक, सामाजिक अलख जगाने वाले गौतम खट्टर ने कहा कि समाज में दो प्रकार की क्रांति प्रचलित है, शस्त्र क्रांति तथा वैचारिक क्रांति। वैचारिक क्रांति के लिए शास्त्रों को पढ़ना अत्यंत आवश्यक है। उचित अनुचित का निर्णय शास्त्र पढ़ने वाला विद्यार्थी ही कर सकता है, जो केवल गुरुकुलीय परंपरा में ही संभव है।
उन्होंने कहा सुमेधा जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में आयोजित यह शास्त्रीय स्पर्धा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक संदेश है। आचार्य बालकृष्ण को छात्राओं ने स्वनिर्मित श्लोकों से युक्त प्रशस्तिपत्र भी दिया। छात्राओं ने अपनी शास्त्रीय समझ को व्यक्त करते हुए गीता संवाद नाटिका एवं गीता गौरव गान की प्रभावशाली व आकर्षक प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया।
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