गजरौला नगर पालिका एक सकारात्मक पहल शुरू करेगी। गन्ना, गाजर और फलों का जूस आदि निकालने के बाद बचे पदार्थों को एकत्र करेगी। इसके लिए रोजाना पूरे नगर में एक ई-रिक्शा भ्रमण कर इकट्ठा करने के बाद गोशाला पहुंचाएगी। इसके अलावा मटर के छिलकों और हरी सब्जियों की पत्तियों को भी एकत्र किया जाएगा। इससे गोशाला में 185 गोवंशीय पशुओं के चारे का काम चलेगा।
गजरौला नगर पालिका के अधीन कान्हा गोशाला है। जिसमें 185 गोवंशीय पशु हैं। इनमें कई गाय दूध दे रही हैं। गोवंशीय पशुओं को भूसा और हरा चारा दिया जाता है। इसके अलावा घरों में बची रोटियां भी भिगोकर भूसे में मिलाकर खिलाई जाती हैं। कूड़ा एकत्र करने वाली गाड़ियों के चालक रोटी इकट्ठी करते हैं। अब पालिका एक नया सकारात्मक कार्य करने शुरू करेगी। पालिका ने नगर के विभिन्न मोहल्लों में ठेला लगाकर फलों का जूस निकालने वाले स्थलों को चिह्नित किया है। इसके अलावा वह इलाके भी चिह्नित किए हैं, जहां पर जूस निकालने के स्थायी ठिकाने हैं। नगर पालिका अनार, सेब, गाजर, मौसमी, संतरा आदि का जूस निकालने के बाद बचे पदार्थों को एकत्र करेगी। वहीं लोगों से भी अपील करेगी कि घरों में हरी सब्जी की बेकार पत्तियों और मटर के छिलकों को भी कूड़े में न डालें, बल्कि उसे भी एकत्र कर लें। उसे पालिका का वाहन ले जाएगा। इसके लिए नगर पालिका रोजाना एक ई-रिक्शा नगर में घुमाएगी।
ईओ विजेंद्र सिंह पाल का कहना है कि गाजर और फलों के जूस निकालने के बाद बचे पदार्थ गोशाला में पल रहे गोवंशीय पशुओं के चारे का काम करेंगे। गाजर, सेब, पपीता, केला आदि का बचा पदार्थ बड़े चाव से खाते हैं।