जिले के भोले लोगों को बातों में उलझाकर शातिरों ने उनके खून-पसीने की कमाई ऐंठ ली। स्कीम के तहत लकी ड्रा निकालने का झांसा दिया और रुपये जमा कराकर चंपत हो गए। ग्रामीण क्षेत्र में एक के बाद दूसरे परिवार के तमाम सदस्यों की चेन को जोड़ा और रुपये जमाकर दफ्तर में ताला लगा दिया। अब आरोपियों के मोबाइल भी बंद हैं और पीड़ित अपने रुपयों के लिए भटक रहे हैं।
जालसाजों का निशाना बने देहात थाना क्षेत्र के अदलपुर ताज निवासी फरमान ने बताया कि चार युवक उनके पास नवंबर 2012 आए थे। स्कीम बताते हुए कहा था कि 40 महीने तक उनको 1200 रुपये जमा करने होंगे। हर महीने की 21 तारीख को ड्रा निकाला जाएगा, जिसमें जीतने वाले को बाइक इनाम में मिलेगी।
अगर किसी का नंबर नहीं आएगा तो उसको 41 वें महीने जमा की गई धनराशि वापस कर दी जाएगी। उन्होंने अपना कार्यालय जोया रोड पर बताया और बातों में उलझा लिया। बताया कि, उसने अपने अलावा भाई इरफान, उमर, भतीजी जन्नत व रिश्तेदार जाकिर निवासी सैंदरी की रसीद कटवा दी थी।
शातिरों ने उसको बाकायदा पासबुक बनाकर दी थी, जिसमें हर माह की धनराशि लिखी जा रही थी। किस्त भी लेने यही लोग घर आते थे। 32 महीने तक लकी ड्रा निकलते गए। इसके बाद शातिर बहाने बनाने लगे और कार्यालय पर ताला जड़ दिया। बीच में काम बंद करने की कुछ मजबूरी बताई। बाद में फिर धंधा शुरू कर दिया।
35 महीने बाद शातिरों ने जमा की गई रकम देने से मना कर दिया। मोबाइल नंबर भी बदल दिए। साल भर होने को है, मगर अब रुपये नहीं लौटा रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि, अब जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देंगे।
गैंग ने गांवों में खड़ा किया नेटवर्क
गैंग के सदस्यों का अंदाज बेहद शातिराना है। गिने चुने शहरियों को ही उन्होंने स्कीम का लालच देकर रुपये ऐंठे, जबकि ग्रामीण इलाके में ऐसा नेटवर्क खड़ा कर दिया कि 300 लोगों की चेन बना डाली। एक-एक परिवार के कई-कई सदस्य उनके झांसे में आ गए और महीनों तक रुपये जमा करते रहे।
स्कीम चलाने वाले लोगों से बीती छह मई को मुलाकात हुई थी, जिनसे रुपये मांगे तो दूसरे पर टाल दिया। धीरे धीरे साल भर होने को है, किन्तु कोई रुपया नहीं मिला है। अब अफसरों के दर पर न्याय दिलाने की गुहार लेकर जाएंगे।
उमर, ठगी का शिकार युवक
ऐसी कोई शिकायत अभी नहीं मिली है। यदि ऐसा कुछ हुआ है तो बड़ा मामला है। तहरीर मिलते ही रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। शील कुमार, सीओ सिटी