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कोरोना-डेंगू के खौफ में एड्स को भूले, एक साल में बढ़े दोगुने मरीज

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अमरोहा। कोरोना और डेंगू के खौफ के बीच लोग एड्स को भूलते जा रहे हैं। एड्स से बचाव के लिए जागरूकता के प्रयास भी अब देखने को नहीं मिलते। इसकी गवाही स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े दे रहे हैं। पिछले साल एड्स के मरीजों की संख्या केवल सात थी, जो अब बढ़कर 21 हो गई है। यानी दोगुनी रफ्तार से केस बढ़े हैं। ऐसे में लोगों में जागरूकता और लापरवाही बरतना इसका मुख्य कारण नतीजा है।
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सीएमओ डॉ संजय अग्रवाल ने बताया कि एड्स एक ऐसी महामारी है जो पूरे विश्व में फैल चुकी है। इस बीमारी के प्रति जागरूकता के लिए 1988 के बाद से एक दिसंबर को हर साल पूरे विश्व में विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि नैतिकता पूर्ण जीवन असुरक्षित यौन संबंधों से बचाता है। दूसरे की प्रयोग की गई सिरिंज व सुई का प्रयोग ना करें। सरकार द्वारा प्रमाणित ब्लड बैंक के खून का प्रयोग ही मरीज को चढ़वाने में करें। बताया एचआइवी की जांच जनपद के सभी राजकीय चिकित्सालयों में निशुल्क उपलब्ध है। कोरोना और डेंगू के खौफ में लोग एड्स को भूल गए हैं। ये ही वजह है कि एड्स के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। उन्होंने बतासा कि पिछले साल जनपद में केवल सात मरीज थे, जो अब बढ़कर 21 हो गए हैं। यह एक चिंता का विषय हैं। इस बीमारी को लेकर जागरूक होने की जरूरत है।
गर्भवती माता से बच्चे के संक्रमित होने की 35 प्रतिशत संभावना
फिजीशियन डॉ. फाइल अली ने बताया कि एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला से बच्चे के पॉजीटिव होने की 35 प्रतिशत संभावना रहती है। यदि महिला शुरुआत में ही उपचार के लिए आ जाए तो यह संभावना 10-12 प्रतिशत रहती है। आठ माह की बजाय यदि महिला का तीसरे-चौथे महीने में उपचार शुरू हो जाता है, तो बच्चे से यह खतरा काफी कम हो जाता।
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एचआईवी के कारण
. एक से अधिक लोगों के साथ असुरक्षित यौन संबंध से
. एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने से
. संक्रमित सुई और सिरिंज के इस्तेमाल से
. एचआईवी संक्रमित गर्भवती मां से उसके होने वाले बच्चे को
एचआईवी के लक्षण
. वजन कम होना और किसी भी बीमारी में दवा का असर न होना
. गले-मुंह में लगातार छाले रहना और उल्टी व दस्त की समस्या
. खुजली, हरपीज और गुप्त रोग होना
. मेडिकल में एचआईवी की जांच निशुल्क कराएं
ये बरतें सावधानी
. शादी से पहले युवक-युवती एचआईवी जांच कराएं
. असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित रक्त और सुई से बचें
. सामान्य व्यक्ति भी बच्चों की जांच कराएं
. पौष्टिक भोजन और स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं
. धूम्रपान, मद्यपान, नशीली दवाओं का सेवन न करें
. व्यायाम करें, शारीरिक स्वच्छता पर ध्यान दें
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