सरकारी जमीन पर बोई फसल ट्रैक्टर से जुतवाते अधिकारी।
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जिसका डर था, अखिर वह हो ही गया। राजस्व और वन विभाग के नक्शे में अंतर के बहाने रविवार को कब्जेदारों ने ट्रैक्टर रोक दिया। इससे कई दिन से जेबड़ा ऐतमाली में चल रहा जंगल की जमीन को कब्जामुक्त कराने का अभियान आखिरकार रुक गया। विवाद पर मौके पर पहुंची वन महकमे की टीम ने संबंधित राजस्व लेखपालों को बुलाया भी मगर वे नहीं आए। इससे दोनों लेखपालों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। इसी के साथ चर्चा शुरू हो गई कि, राजनीतिक दबाव असर दिखाने लगा है।
हसनपुर तहसील क्षेत्र के बिहारीपुर-जेबड़ा ऐतमाली के जंगल में वन विभाग की करीब 53 सौ बीघा से अधिक भूमि पर कब्जा है। एक दशक से कब्जा की गई जमीन पर फसलें उगाई जा रहीं हैं। इस मसले पर अमर उजाला ने अफसरों का ध्यान खींचा तो जांच आगे बढ़ी।
पता चला कि, वन विभाग के अफसरों और कर्मचारियों ने कब्जा कराने में एवज में पांच लाख रुपये लिए हैं। इस मामले में डिप्टी रेंजर हरीश मेहता और फॉरेस्टर सुरेश राम को सस्पेंड कर दिया गया। इसके बाद अफसरों ने खामाशी अख्तियार कर ली।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक रूपक डे ने मुख्य वन संरक्षक बरेली जोन अरविंद कुमार गुप्ता और वन संरक्षक/क्षेत्रीय निदेशक आरपी वर्मा को तलब किया। इस पर फिर कार्रवाई आगे बढ़ी। शनिवार को करीब सौ बीघा भूमि पर ट्रैक्टर चलवाकर जमीन को कब्जामुक्त भी कराया गया।
सेक्सन अधिकारी हरदेव सिंह ने बताया कि रविवार को फसलों पर ट्रैक्टर चलवाया जाता। लेकिन दोनों राजस्व लेखपाल मौके पर नहीं पहुंचे। लेखपालों की ओर से की गई ठियाबंदी वन विभाग के नक्शे के मुताबिक गलत साबित हो रही है। फिर से दोनों नक्शों का मिलान कर सर्वे कार्य चेक कराया जाएगा।