हसनपुर तहसील क्षेत्र में वन विभाग की जमीन पर विभागीय अफसरों द्वारा कई दिन पूर्व तहस नहस कराई सरसों की फसल के बाद अब माफियाओं ने गेहूं की बुवाई कर दी है। जिससे गांव के लोग विभागीय अफसरों पर माफियाओं से मिली भगत होने के आरोप लगा रहे हैं। खास बात यह है कि कई महीने से चार हजार बीघे जमीन पर चल रहे माफियाओं के अवैध कब्जे के प्रकरण के बाद भी विभाग का कोई जिला स्तरीय अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा है।
हसनपुर तहसील के जेबड़ा में वन विभाग की चार हजार बीघे जमीन से थोड़ी बहुत बची होगी, बाकी पर माफियाओं की फसलें लहला रही हैं। पिछले महीनों में माफियाओं ने वन विभाग की जमीन पर खड़े पेड़ पौधों को नष्ट कर सरसों की फसल की बुवाई कर दी थी। इसके बाद भी वन विभाग के अफसर खामोश थे।
आरोप था कि प्रदेश सरकार के एक कैबिनेट मंत्री के हस्तक्षेप के चलते और माफियाओं से मोटी रकम लेने के कारण वन विभाग के अफसरों के हाथ बंध गए हैं। जेबड़ा और बिहारीपुर में वन विभाग की जमीन पर माफियाओं के अवैध कब्जे की शिकायत मुख्य वन संरक्षक, रुहेलखंड जोन उत्तर प्रदेश बरेली अरविंद कुमार गुप्ता तक पहुंची तो उन्होंने प्रभागीय वन अधिकारी को फटकार लगाते हुए माफियाओं के चंगुल से जमीन को कब्जा मुक्त कराने के निर्देश दिए थे।
मुख्य वन संरक्षक से फटकार खाने के बाद विभागीय अफसरों ने तीन दिन ट्रैक्टर चलवाकर माफियाओं की सरसों की फसल को नष्ट कर दिया था। इसके बाद खामोशी की चादर ओढ़ ली। जिसका फायदा उठाते हुए माफियाओं ने इस जमीन पर दोबारा कब्जा कर गेहूं की बुवाई कर दी है।
खास बात यह है कि जेबड़ा और बिहारीपुर व पथरा में 53 सौ बीघे जमीन पर माफियाओं के अवैध कब्जे का प्रकरण विगत कई महीने से चल रहा है। मगर इसके बाद भी विभाग के किसी जिला स्तरीय अधिकारी ने मौके पर जाकर अपनी जमीन की सुध नहीं ली है। जिससे माफियाओं के हौंसले बुलंद हैं।