औद्योगिक इलाके में काम करने वाले 15 हजार से अधिक श्रमिकों को औद्योगिक इकाइयों तक आने जाने में अंधेरे का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके लिए नगर पालिका पांच हाई मास्ट और 300 एलईडी लाइट लगवा रही है। रोशनी व्यवस्था उचित हो जाने के बाद जहां औद्योगिक इकाइयों की आवासीय कालोनियों के आस-पास अंधेरे में अपराधी के छिपने का डर नहीं रहेगा, वहीं सुरक्षा चक्र भी मजबूत होगा।
औद्योगिक क्षेत्र गजरौला में साइड-1 एवं औद्योगिक क्षेत्र साइड-2 हैं। जिनमें 29 फैक्टरी हैं। 28 मई 2020 तक फैक्टरी इलाका उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अधीन था। जिसे नगर पालिका को हस्तांतरित किया गया है। औद्योगिक इकाइयों में 15 हजार से अधिक श्रमिक काम करते हैं। इसके अलावा सभी इकाइयों में अपनी आवासीय कालोनियां हैं। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण औद्योगिक इकाइयों से प्रति वर्ष एक करोड़ से अधिक का राजस्व वसूल करता था, लेकिन उसने विकास कार्यों पर ध्यान नहीं दिया। न तो पथ प्रकाश के इंतजाम किए गए और न ही नाला व नाली निर्माण कार्य कराए गए। कुछ नाले बनाए गए थे, जिनकी सफाई न होने की वजह से वह अट गए। इसके अलावा डिवाइडर नहीं होने के कारण औद्योगिक इकाइयों में आते जाते समय हादसे का डर बना रहता है। कई बार झाड़ियों में तेंदुए को देखा गया। जिसकी वजह से आवासीय कालोनियों के लोगों संग ही श्रमिक भी खौफ में जीते थे। श्रमिकों और आवासीय कालोनियों का सुरक्षा चक्र मजबूत करने के लिए ही पालिका द्वारा पांच हाईमास्ट लाइट व 300 एलईडी लाइट लगवाई जा रही हैं। जिनका अधिकांश कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके अलावा डिवाइडर बनाए जाने का कार्य भी पूरा होने वाला है।
फैक्टरी इलाके में पथ प्रकाश पर 50 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। लाइट लगवाने का कार्य पूर्ण हो चुका है। हाईमास्ट लाइट जलने लगी हैं। एलईडी लाइटों को बिजली देने का काम बाकी रह गया है जोकि सप्ताह भर में हो जाएगा।
विजेंद्र सिंह पाल, ईओ, नगर पालिका, गजरौला