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Amroha News: पहले किया इन्कार, अब बीमा कंपनी को चुकाने होंगे ब्याज समेत दस लाख रुपये

Sat, 27 Sep 2025 10:55 PM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
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अमरोहा। किसान की मौत के बाद बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इन्कार कर दिया। मामले में अब उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी को क्लेम के दस लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज समेत लौटाने के निर्देश दिए हैं। कंपनी को मानसिक और आर्थिक पीड़ा व वाद व्यय के रूप में 15 हजार रुपये भी देने होंगे।
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मंडी धनौरा थानाक्षेत्र के ढ्योटी गांव में अतुल कुमार का परिवार रहता है। उनके पिता रवि कुमार उर्फ रविंद्र किसान थे। उनका एक बैंक में खाता था। बैंक ने साल 2021 में 500 रुपये की प्रीमियम धनराशि खाते से काटकर बीमा किया था। बैंक के साथ मुंबई की एक बीमा कंपनी भी जुड़ी हुई थी। एक साल की इस बीमा पॉलिसी का 26 सितंबर 2022 को नवीनीकरण कराया गया। इस दौरान बीमा कंपनी और बैंक ने रीनुअल प्रीमियम धनराशि स्वयं काट ली थी।

इसके बाद 25 सितंबर 2023 तक के लिए फिर नवीनीकरण हो गया लेकिन 26 जुलाई 2022 को रवि कुमार का एक्सीडेंट हो गया जिसके बाद वह कोमा में चले गए और 15 नवंबर 2022 को उनकी मौत हो गई। अतुल कुमार ने बछरायूं थाने में मुकदमा दर्ज कराया और पिता रवि कुमार की पॉलिसी का क्लेम लेने के लिए आवेदन किया था। इस पर बैंक और बीमा कंपनी ने टोल फ्री नंबर पर बात करने की सलाह दी।
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सुनवाई नहीं होने पर पीड़ित अतुल ने बैंक और बीमा कंपनी को नोटिस भेज भेजा लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इस पर पीड़ित अतुल कुमार ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित बैंक और बीमा कंपनी का अधिकारियों को तलब कर लिया। बीमा कंपनी में दावा किया कि रवि कुमार उर्फ रविंद्र के अस्पताल में भर्ती होने के मामले में सभी दस्तावेज प्रमाणित कॉपी मांगी गई थी जिन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया।

कंपनी को एक माह में देनी होगी रकम

एक जून 2023 को बीमा दावा पत्रावली बंद कर दी गई। दावा किया कि रवि कुमार अस्पताल से डिस्चार्ज होने के दो महीने बाद मौत हुई थी। 17 अगस्त 2022 को सांस लेने में तकलीफ हुई थी जिस कारण उन्हें दोबारा से अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन इसका दुर्घटना से कोई संबंध नहीं है। कंपनी का तर्क सुनने के बाद उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट कहा कि रवि कुमार की मौत सड़क हादसे में आई गंभीर चोटों के कारण हुई है, जबकि बैंक और बीमा कंपनी के द्वारा दिया गया तर्क विधिसंगत नहीं है। लिहाजा उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को नौ प्रतिशत ब्याज समेत क्लेम के 10 लाख रुपये देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए 10 हजार व वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये देने को कहा है। बीमा कंपनी को यह धनराशि एक महीने के भीतर अदा करनी होगी।
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