अमरोहा। विरोध के बाद भी मध्य गंगा नहर की खोदाई शुरू होने पर रविवार को ग्रामीणों और किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। खोदाई करवाने के लिए पहुंचे अधिकारियों से किसान भिड़ गए। किसान और अधिकारियों के बीच खींचतान हुई। महिलाएं खोदाई के लिए मंगाई गई जेसीबी के आगे लेट गईं। एक महिला व किशोरी चोटिल हो गईं। आक्रोशित किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने ही डीजल उडे़लकर आग लगाकर जान देने की कोशिश की। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी बैक फुट पर आ गए और तुरंत जेसीबी को वहां से हटा लिया गया।
गुस्साए किसान मौके पर ही धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस और पीएसी तैनात की गई। किसानों ने पुलिस पर लाठीचार्ज करने और एडीएम राजस्व एवं वित्त पर गाली-गलौज करने का आरोप लगाया है।
जनपद में मध्य गंगा नहर के निर्माण का कार्य चल रहा है। पूरे जिले में काम पूरा हो चुका है लेकिन तीन गांव कूबी, रामपुर घना व मोहनपुर में अभी तक लटका है। प्रयासों के बाद भी अधिकारी किसानों को मनाने में कामयाब नहीं हो पा रहे है। इन तीनों गांव के किसान बीते 11 महीने से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं। किसानों का कहना है कि जमीन प्रशासन ने वर्ष 2011 में अधिग्रहण कर ली थी, लेकिन उस समय किसी को मुआवजा नहीं दिया था। अब जमीन की कीमत काफी अधिक हो गई है। प्रशासन उनको पहले सर्किल रेट से ही जमीन के मुआवजा दे रहा है। किसान उस पर बिल्कुल सहमत नहीं हैं। मौजूदा सर्किल रेट के हिसाब से चार गुना अधिक मुआवजा दिया जाए। लेकिन बीच-बीच में प्रशासन किसानों की सहमति के बिना नहर की खोदाई करने की कोशिश करता रहा है। इसके विरोध में कूबी में महिलाएं भी लगातार भूख हड़ताल पर बैठी हैं।
रविवार की सुबह डीएम राजेश कुमार त्यागी और एसपी कुंवर अनुपम सिंह की नेतृत्व में छह जेसीबी लगाकर रामपुर घना गांव के जंगल में नहर खोदाई का कार्य शुरू कर दिया गया। जब इसकी जानकारी किसानों को हुई तो उनका गुस्सा भड़क गया। बड़ी संख्या में किसान मौके पर पहुंच गए। किसानों ने नहर की खुदाई का विरोध किया तो हंगामा हो गया। किसानों और अधिकारियों के बीच खींचतान हो गई। बड़ी संख्या में महिलाएं जेसीबी मशीनों के आगे लेट गईं। जिससे एक किसान की बेटी पलक और बहन अनिता चोटिल को गई। जबरन नहर की खोदाई की जानकारी मिलते ही भाकियू टिकैत गुट के प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी दानवीर सिंह और जिलाध्यक्ष रामपाल सिंह संगठन के तमाम पदाधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गए। किसानों का आक्रोश देखकर प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा। मौके की नजाकत देखते जेसीबी मशीनों को वहां से हटाकर दूसरे स्थान पर लगा दिया गया।
बाद में डीएम-एसपी समेत आला अधिकारी कलक्ट्रेट में जाकर बैठ गए। जबकि किसान उसी स्थान पर धरने पर बैठ गए, जहां प्रशासन ने नहर की खुदाई शुरू की थी। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस-पीएसी तैनात की गई है।
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एडीएम राजस्व एवं वित्त पर गाली-गलौज का आरोप
जिस समय किसानों ने नहर की खोदाई का विरोध किया था, तब एडीएम राजस्व एवं वित्त सुरेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे थे। किसानों और अधिकारियों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। जिसके बाद किसानों ने एडीएम राजस्व एवं वित्त सुरेंद्र सिंह पर गाली-गलौज का आरोप लगाया है। बाद में एडीएम सुरेंद्र सिंह वहां से चले गए। डीएम राजेश कुमार त्यागी ने एडीएम न्यायिक माया शंकर को किसानों को समझने के लिए भेजा। एडीएम न्यायिक ने किसानों से कलक्ट्रेट में बैठकर वार्ता करने के लिए अपील की। इस दौरान कुछ किसानों ने इस पर सहमति जताई, जबकि कुछ विरोध करने लगे और अधिकारियों को धरना स्थल पर ही बुलाने की मांग की।
नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे किसान
अमरोहा। मध्य गंगा नहर की खोदाई को लेकर किसान और प्रशासन के बीच करीब पांच घंटे तक तनातनी का माहौल रहा। करीब 1:30 बजे किसान भाकियू टिकैत के प्रदेश उपाध्यक्ष दानवीर सिंह के नेतृत्व में जोया रोड पर आ गए और नारेबाजी करते हुए पहले एडीएम आवास तक पैदल मार्च किया। बाद में सभी कलक्ट्र्रेट पर पहुंचे। किसानों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। मनमाने ढंग से नहर की खोदाई करने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी। किसानों के जोया मार्ग पर आते ही पुलिस को यातायात को वन वे करना पड़ा। करीब दो किलोमीटर पैदल मार्च के चलते जोया रोड पर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जाम की स्थिति बनी रही।
एडीएम की गलती पर डीएम ने मांगी माफी
बिना सहमति के नहर की खुदाई से नाराज किसान कलक्ट्रेट पहुंचे। यहां डीएम कार्यालय के बाहर बरामदे में बैठ गए। किसानों ने एडीएम राजस्व एवं वित्त की गाली-गलौज करने पर नाराजगी जताई। किसानों ने एडीएम सुरेंद्र सिंह को किसानों के बीच बुलाने की मांग की। तभी डीएम राजेश कुमार त्यागी और एडीएम न्यायिक माया शंकर किसानों के बीच पहुंचे और एडीएम राजस्व एवं प्रशासन की ओर से की गई अभद्रता की गलती मानी। जिसके बाद किसानों का गुस्सा शांत हुआ।
पहले होगी वार्ता, फिर नहर खोदाई पर होगा निर्णय
कलक्ट्रेट में किसानों और अधिकारियों के बीच मध्य गंगा नहर की खुदाई को लेकर करीब एक घंटे तक वार्ता चली। इस दौरान किसान सर्किल रेट से चार गुना अधिक मुआवजे की मांग पर अड़े रहे। जबकि अधिकारी अपने हाथ बंधे हुए होने की बात कहते रहे। करीब एक घंटे चली वार्ता के बीच कोई निर्णय नहीं हो सका। इस दौरान किसानों ने बिना सहमति नहर की खोदाई नहीं करने की बात कही। इस पर प्रशासनिक अधिकारी सहमत हो गए। भाकियू टिकैत के जिलाध्यक्ष रामपाल सिंह ने बताया कि पहले अधिकारियों और किसानों के बीच वार्ता होगी। ये वार्ता कब होगी ये तारीख या दिन तय नहीं हुआ है। डीएम राजेश कुमार त्यागी शासन और सिंचाई विभाग से जुड़े अधिकारियों से इस संबंध में बात करेंगे। फिलहाल ये तय हुआ कि किसानों की सहमति के बिना नहर की खोदाई नहीं की जाएगी।
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पैर पीछे नहीं खींचता प्रशासन तो गंभीर हो जाते हालात
कूबी, रामपुर घना व मोहनपुर के किसान मध्य गंगा नहर की खोदाई के विरोध में हैं। बीते करीब ग्यारह महीने से कूबी में धरना दे रहे हैं। किसान सर्किल रेट से चार गुना मुआवजे की मांग कर रहे हैं। महिलाएं 18 दिनों से भूख हड़ताल कर रहीं हैं। लेकिन रविवार को पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी धरना स्थल से करीब छह किलोमीटर दूर रामपुर घना के जंगल में नहर की खोदाई करने पहुंच गए। जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में किसान मौके पर पहुंच गए। इस दौरान मोहनपुर के किसान जयवीर सिंह और टिंकू ने अधिकारियों के सामने की डीजल उड़ेलकर लिया और आग लगाकर जान देने की बात कही। इतना ही नहीं महावीर सिंह समेत दो किसानों के हाथ में भी डीजल की केन थी। मौके की स्थिति देखकर प्रशासनिक अधिकारियों के होश उड़ गए। तुरंत ही अधिकारियों ने माचिस को छीनी। अगर प्रशासन अपनी कार्रवाई को लेकर यू टर्न नहीं लेता तो शायद चार लोगोंं की जान जा सकती थी।
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नहर की खोदाई काफी समय से लटकी हुई थी। जिसे आज शुरू किया गया, लेकिन ग्रामीणों ने विरोध किया। उनके विरोध के बाद कार्य को रुकवा दिया गया है। चार गुना मुआवजा की जो मांग वह उठा रहे हैं, वह नियमानुसार उचित नहीं है। फिलहाल कार्य को रुकवा दिया गया है। उच्चाधिकारियों और ग्रामीणों से वार्ता के बाद ही नहर की खोदाई कराई जाएगी। ग्रामीणों को शांत कर वापस भेज दिया गया।
-राजेश कुमार त्यागी, डीएम, अमरोहा
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ये पूरा मामला सिंचाई विभाग से जुड़ा है। पुलिस सुरक्षा के लिए तैनात की गई थी। पुलिस की ओर से किसानों पर लाठी चार्ज नहीं किया गया। बाद में किसानों की कलक्ट्रेट में अधिकारियों के साथ वार्ता हुई है। वहां पर दो किसानों ने अपने ऊपर तेल उड़ेल लिया था। जिन्हें पुलिस की सतर्कता से बचाया गया।
- कुंवर अनुपम सिंह,एसपी