बसपा नेता और सिविल कंस्ट्रक्शन ठेकेदार कैलाश चंद्र की हत्या नहीं हुई। प्रेमिका के धमकाने पर बसपा नेता ने हिस्ट्रीशीटर दोस्त के तमंचे से ही खुद को गोली मार कर जीवन लीला समाप्त कर ली।
पुलिस ने प्रेमिका सोनम और हिस्ट्रीशीटर दोस्त को गिरफ्तार कर खुलासा करने का दावा किया है। हालांकि पुलिस हिस्ट्रीशीटर दोस्त का तमंचा बरामद नहीं कर सकी है। उधर, कैलाश के परिजनों ने मामले में हत्या की बात कहते हुए थ्ााने का घेराव कर लिया।
बता दें ने कि बसपा नेेता कैलाश चंद्र निवासी गांव तिगरिया भूड़ की 17 मई की सुबह खुद के मकान में तीसरी मंजिल पर स्थित कमरे में बेड पर खून से लथपथ लाश पड़ी मिली थी। 315 बोर की गोली कनपटी के पास से पार होकर तकिये में घुस गई थी।
मौका ए वारदात से पुलिस को कोई तमंचा बरामद नहीं हुआ। जबकि खून की बूंदे जीने के होते हुए ग्राउंड फ्लोर तक पायी गईं थीं। मौका एक वारदात के हालात हत्या की ओर इशारा कर रहे थे। इस मामले में पुलिस ने मृतक बसपा नेता के बड़े भाई अमर सिंह की ओर से मृतक की दूसरी पत्नी ऋतु रस्तोगी निवासी हसनपुर और प्रेमिका सोनम उर्फ सन्तरेश निवासी मोहल्ला सुल्तान नगर गजरौला के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी थी।
कैलाश के करीबियों पर पुलिस की पहले ही नजर थी। थानाध्यक्ष अशोक सोलंकी ने शनिवार को प्रेस वार्ता में बताया कि हत्या का मुकदमा आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में तरमीम किया गया है। सोनम उर्फ संतरेश को आत्महत्या के लिए उकसाने और नरेंद्र को मौके पर होने के बावजूद साक्ष्य का विलोपन करने के आरोप में गिरफ्तार कर चालान किया गया है।
गिरफ्तार नरेंद्र, मृतक बसपा नेता का दोस्त था। 16 मई की रात भी नरेंद्र, कैलाश के घर डिजायर कार से गया था, जहां दोनों ने साथ शराब पी और खाना खाया। देर रात करीब ढाई बजे के बाद कैलाश मोबाइल पर सोनम से बातचीत कर रहा था। इसी दौरान नरेंद्र भी अपना 315 बोर का लोड तमंचा टेबिल पर रख कर नीचे चला गया था।
सोनम ने कैलाश से मोबाइल पर अपना मकान उसके नाम करने का दबाव बना रही थी, ऐसा न करने पर दुष्कर्म के आरोप में फंसाने की धमकी दे रही थी। जिससे त्रस्त होकर कैलाश ने नरेंद्र के तमंचे से खुद गोली कार कर आत्महत्या कर ली।
गोली चलने के बाद जब नरेंद्र कमरे में पहुंचा तो कमरे का नजारा देख कर अपना तमंचा लेकर स्विफ्ट डिजायर कार से फरार हो गया। इसी बीच खून की बूंदे ग्राउंड फ्लोर तक टपकती हुई गई। नरेंद्र ने खुद के फंसने के अंदेशे में तमंचा तिगरी गंगा में फेंक दिया। जो काफी प्रयास के बावजूद बरामद नहीं हो सका।