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Amroha News: लेंस के इंतजार में पथरा रहीं आंखें

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अमरोहा। जिला अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था बेपटरी है। डेढ़ महीने से अस्पताल में लेंस नहीं होने के कारण मरीजों के आंखों के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। समय बढ़ने के साथ ही मरीजों की आंखों में परेशानी भी बढ़ रही है। भीड़ बढ़ने के डर से डॉक्टर नए मरीजों को ऑपरेशन का समय भी नहीं दे रहे हैं। जिला अस्पताल में दो नेत्र रोग विशेषज्ञ होने के बाद भी मरीज परेशानी उठा रहे हैं। दोनों डॉक्टर सिर्फ ओपीडी तक सीमित हैं।
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जिला अस्पताल में रोजाना 1200 से 1500 मरीजों की ओपीडी होती है। इसमें करीब 200 मरीज आंखों की समस्या के पहुंचते हैं। यहां पर नेत्र सर्जन डॉ. अनिल कुमार गौतम और डॉ. मनीष तिवारी तैनात हैं। दोनों ही डॉक्टर ऑपरेशन भी करते हैं लेकिन डेढ़ महीने पहले आंखों में डालने वाले लेंस खत्म हो गए। जिस कारण ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं।
सीएमएस डॉ. प्रेमा पंत त्रिपाठी ने शासन को डिमांड भी भेज दी है लेकिन लेंस नहीं मिलने के कारण ऑपरेशन बंद हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ऑपरेशन का इंतजार कर रहे मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। पुराने और नए मिलाकर सैकड़ों मरीज बार-बार अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं। नए मरीजों को तारीख भी नहीं दी जा रही है।
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नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार गौतम ने बताया कि लेंस खत्म होने के कारण ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। फिलहाल, ओपीडी में आने वाले मरीजों का चेकअप कर उनकी जांच कराई जा रही है। लेंस आने के बाद मरीजों का ऑपरेशन हो सकेगा। इसके बाद नए मरीजों को ऑपरेशन के लिए तारीख दी जाएगी।
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अस्पताल में 50 फीसदी डाॅक्टर भी नहीं
संयुक्त जिला चिकित्सालय में शासन से डॉक्टरों के 52 पद स्वीकृत हैं लेकिन महज 20 चिकित्सकों के सहारे स्वास्थ्य सेवाएं जैसे-तैसे रेंग रही हैं। जिला अस्पताल प्रशासन साल में चार-चार बार चिकित्सकों की कमी पूरी करने के लिए डिमांड शासन को भेजता है लेकिन हर बार नतीजा शून्य रहता है। अस्पताल में छह महिला चिकित्सकों समेत 32 पद खाली पड़े हैं। ऐसे में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं कैसे मिलेंगी।

कार्डियोलॉजिस्ट की आज तक नहीं हुई तैनाती
अस्पताल में फिजीशियन के दो पद हैं, जबकि एक डॉक्टर तैनात हैं। चेस्ट फिजिशियन और कार्डियोलॉजिस्ट के एक-एक पद पर आज तक डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी। बाल रोग विशेषज्ञ के दोनों पद भरे हैं। एनेस्थीसिया के दो पदों पर एक डॉक्टर हैं। जनरल सर्जन के दो पद में से एक डॉक्टर की तैनाती है। ऑर्थोपैडिक सर्जन के दोनों पद भरे हुए हैं। ईएनटी सर्जन के एक पद पर डॉक्टर तैनात हैं। रेडियोलॉजिस्ट के दो पदों में से एक ही डॉक्टर हैं, जबकि एक डॉक्टर इस्तीफा देकर चले गए। चर्म रोग विशेषज्ञ के स्वीकृत एक पद पर डॉक्टर तैनात हैं। ईएमओ के तीनों पद पर भरे हुए हैं। अधीक्षक परामर्शदाता का एक पद है, वह भी खाली है।
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मरीजों का दर्द सुनिए
मेरी आंखों का ऑपरेशन होना है लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि लेंस नहीं हैं। आंखों की सारी जांच भी हो चुकी है। अब समझ नहीं आ रहा क्या करें। मुरादाबाद के निजी अस्पताल में ऑपरेशन कराने की बात की थी लेकिन खर्चा बहुत बता रहे हैं। इसलिए लेंस आने की उम्मीद में बार-बार अस्पताल आते हैं। - यामीन, नूरपुर तुगलकाबाद

मेरी आंखों का ऑपरेशन तीन नवंबर को होना था। पिछले करीब एक महीने से चक्कर काट रहे हैं लेकिन डाॅक्टर लेंस न होने की बात कह रहे हैं। आर्थिक स्थित ठीक न होने के कारण निजी अस्पताल में ऑपरेशन नहीं करवा सकते हैं। समय बढ़ने के साथ आंखों में समस्या भी बढ़ रही है। - यादराम, डिडौली गांव

करीब डेढ़ महीने से लेंस खत्म होने के कारण आंखों के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। जिससे मरीजों को परेशानी हो रही है। लेंस की डिमांड शासन को भेज दी गई है। लेंस के आने के बाद ऑपरेशन शुरू हो जाएंगे। - डॉ. चरन सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
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