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Amroha News: दीपदान कर भर आईं आंखें, मुख्य स्नान आज

Wed, 05 Nov 2025 02:23 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
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तिगरी धाम (अमरोहा)। कार्तिक मास की चतुर्दशी पर मंगलवार शाम लाखों लोगों ने दिवंगतों की आत्मा की शांति के लिए गंगा में दीपदान किया। अपने संगे संबंधी और परिजनों से बिछड़े लोगों को याद कर परिजनों की आंखें भर आईं। इस परंपरा को निभाते वक्त गंगा घाट ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे आकाश से तारे धरती पर उतर आए हों।
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दीयों की रोशनी से गंगा तट जगमगा उठा था। यह सिलसिला देर रात तक जारी रहा। घाटों का माहौल गमगीन हो गया। दीपदान की यह प्रथा महाभारत काल से चली आ रही है। उधर, गंगा स्नान के लिए गंगा तिगरी मेले में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। वहीं, कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य स्थान बुधवार को होगा। इसके बाद श्रद्धालु घर लौटने लगेंगे।
तिगरी धाम पर गंगा किनारे लगा ऐतिहासिक मेला 28 नवंबर से शुरू हो गया था जबकि विधिवत शुरुआत एक नवंबर को हवन पूजन के साथ हुई थी। मेले का बुधवार को कार्तिक पूर्णिमा पर मुख्य स्नान के साथ समापन होगा। पिछले कई दिनों से लोग गंगा किनारे तंबू बनाकर रह रहे है जिससे में गंगा किनारे तंबुओं का शहर बस गया है। पिछले कई दिनों से गंगा किनारे पड़ाव डालकर रह रहे श्रद्धालु विभिन्न धार्मिक आयोजन करने के साथ गंगा में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं।
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मेले का सबसे अहम पर्व चतुर्दशी को मनाया जाता है जिसमें लोग सालभर में अपने मृतक अपने परिजनों की आत्मा की शांति के लिए गंगा में दीपदान करते हैं। मंगलवार शाम सूर्यास्त होते ही तिगरी गंगा घाट पर श्रद्धालु दीपदान के लिए पहुंच गए। नम आंखों से अपने पूर्वजों के लिए दीपदान किया। शाम के समय परंपरा को निभाते वक्त गंगा घाट आसमान में तारों जैसा दिखाई देने लगा। दीपदान के बाद पुरोहितों को वस्त्र, अन्न एवं दक्षिणा आदि का दान भी किया गया। अपनों से बिछड़ों का दर्द भी छलकती आंखों में साफ दिखा जिनमें कुछ मासूम ऐसे भी थे जिन्होंने कम उम्र में ही अपनों को खो दिया।
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यह है दीपदान का महत्व
मान्यता है कि महाभारत युद्ध में मारे गए हजारों सैनिक और असंख्य योद्धाओं की आत्मा शांति के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों की मौजूदगी में सर्वप्रथम चतुर्दशी को दीपदान किया था। तब से यह परंपरा चल रही है। कार्तिक पूर्णिमा पर तिगरी धाम लगने वाले मेले के मुख्य स्नान से एक दिन चतुर्दशी पर अपने पितरों का तर्पण करते हैं। यह दीपदान वही लोग करते हैं, जिनके सगे संबंधी एक वर्ष के अंदर उन्हें छोड़कर परम पिता परमेश्वर की शरण में चले गए हैं। गंगा में दीपदान करने से मृत आत्माओं को शांति मिलती है।
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