एक्सपायरी दवा के काले कारोबार को फैलाने के लिए शहजाद व हसीन ने पूरा ताना-बाना बुन रखा था। सैलरी व कमीशन का लालच देकर वह शहर के युवाओं को अपने जाल में फंसाते थे। एमआर की तरह काम कराते थे। अधिकांश दवाईयों को गांवों व घनी आबादी में स्थित छोटे-छोटे मेडिकल स्टोरों पर खपाते थे।
काले कारोबार का भंडाफोड़ होने के बाद से युवा काम बंद कर अपने घरों में छिप गए हैं। इधर पुलिस एक्सपायर दवाओं की तलाश में जुट गई है। जासूसों के जरिए उसने पड़ताल का काम छेड़ दिया है।
नगर की घनी आबादी के बीच मोहल्ला कुरैशी में पुलिस ने छापा मारकर भारी मात्रा में एक्सपायर दवा पकड़ी थी।
यह दवाई दिल्ली, हरियाणा व यूपी के कई हिस्सों से मंगाई गई थी। थीनर से उसके रेपर की लिखाई मिटाकर कारोबारी अपना रैपर लगा रहे थे। पुलिस ने हसीन व शहजाद को गिरफ्तार कर मामले का भंडाफोड़ किया है, लेकिन काले कारोबार के ये धंधेबाज अपने माल को खपाने के लिए शहर के ही युवाओं का इस्तेमाल कर रहे थे। दर्जन भर युवकों को उन्होंने दवाई को खपाने की जिम्मेदारी सौंप रखी थी।
एमआर के तौर पर उनको रखा था। आठ हजार सैलरी व दवाई की बिक्री पर कमीशन तय कर रखा था। ये युवा अपने आप को किसी भी मेडिकल पर जाकर एमआर ही बताते थे, जबकि दवाई कहीं और की नहीं बल्कि अपनी ही कंपनी की बताकर बेचते थे। हर माह बाकायदा कमीशन व सैलरी का पेमेंट किया जाता था।
जब से एक्सपायर दवाईयों के गोरखधंधे का राजफाश हुआ है तब से दवाइयों को खपा रहे एमआर भी लापता हो गए हैं। हालांकि अभी तक पुलिस का ध्यान उनकी ओर नहीं गया है। जैसे भी हो, एक्सपायर दवाई पकड़ी जाए, बस इसी की कोशिश में पुलिस लगी है। इसके लिए उसने अपने मुखबिरों को भी सतर्क कर दिया है।
एएसपी एनपी सिंह ने कहा दवाई शहर व ग्रामीण क्षेत्र के मेडिकल स्टोरों पर बेची जाती थी। कौन-कौन से मेडिकल स्टोर पर बिक्री की गई है, उसकी जांच पड़ताल का कार्य चल रहा है। जो भी इस धंधे में शामिल हैं, किसी को नहीं बख्शा जाएगा।