अमरोहा। यदि पुलिस ठान ले तो कुछ भी कर सकती है और यदि इरादा बदल जाए तो वहीं होगा जिसका साहब ने मन बना लिया है। जिंदा किशोरी को मृत दर्शाकर ऑनर किलिंग में पिता-भाई व रिश्तेदार को जेल भेजने के मामले में पांच साल बाद भी षड्यंत्रकारी पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल न करना इसका उदाहरण है जबकि मामले में इंस्पेक्टर समेत 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज है।
षड्यंत्रकारी इंस्पेक्टर के खिलाफ न्यायालय ने कुर्की के आदेश दिए, इसका भी पुलिस ने पालन नहीं किया। बीती 14 नवंबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 18 नवंबर तक एफआईआर की प्रगति रिपोर्ट केस डायरी समेत कोर्ट में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे लेकिन पुलिस ने कोर्ट के इन आदेशों को भी अनसुना कर दिया। हैरत की बात यह है कि जिन पुलिसकर्मियों की वजह से निर्दोष होते हुए भी पिता-पुत्र और रिश्तेदार ने जेल काटी वह अब न्याय के लिए भटक रहे हैं।
पुलिस से न्याय की उम्मीद छोड़कर बैठे पीड़ित परिवार को सिर्फ कोर्ट से उम्मीद है। पुलिसकर्मियों के खिलाफ आदमपुर थाने में दर्ज इस मामले की विवेचना संभल क्राइम ब्रांच कर रही है। पांच साल बाद भी विवेचना पूरी कर चार्जशीट दाखिल नहीं करना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। मामले में कोर्ट कड़ा रुख अख्तियार कर सकता है।
यह था पूरा मामला
यह पूरा प्रकरण आदमपुर थानाक्षेत्र के एक गांव का है। गांव निवासी किसान की 15 वर्षीय बेटी छह फरवरी 2019 को खेत से गायब हो गई थी। 10 फरवरी 2019 को किशोरी के भाई ने पांच लोगों के खिलाफ अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने इस मामले में नामजद दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बावजूद इसके किशोरी की बरामदगी नहीं हो सकी थी। मुकदमे की विवेचना तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा कर रहे थे।
उन्होंने जेल भेजे गए दोनों नामजद आरोपियों को निर्दोष बताते हुए रिहा करा दिया था लेकिन बाद में षड्यंत्रकारी पुलिस ने बड़ा कारनामा कर डाला था। 28 दिसंबर 2019 को किशोरी के पिता, भाई और एक रिश्तेदार को किशोरी का हत्यारा बताकर जेल भेज दिया था। तर्क दिया था कि किशोरी के गलत संगत में पड़ने पर परिवार ने इज्जत बचाने के लिए उसकी गोली मारकर हत्या कर दी और बाद में शव गंगा में बहा दिया। सात अगस्त 2020 को किशोरी के जिंदा होने की जानकारी सामने आ गई।
किशोरी अपने गांव से आठ किलोमीटर दूर प्रेमी के गांव में सुरक्षित मिली। खुलासा हुआ कि प्रेमी के साथ शादी करके वह पत्नी के रूप में रह रही थी। इसका पता चलते ही पुलिस ने यू-टर्न लेकर प्रेमी से किशोरी के पति बने युवक को अपहरण और नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। दूसरी ओर यह सच अदालत तक पहुंचा तो किशोरी के पिता, भाई और रिश्तेदार को जेल से रिहाई मिली थी। अदालत की कड़ी टिप्पणी के बाद विवेचना से लेकर खुलासे तक में शामिल रहे इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा समेत ग्यारह पुलिसकर्मियों के खिलाफ के मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मुकदमे की विवेचना संभल क्राइम ब्रांच कर रही है।
इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज है एफआईआर
जिंदा किशोरी की हत्या का षड्यंत्र रचने वाले इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा, एसआई मोहम्मद आरिफ, एसआई राकेश कुमार, एसआई मनोज कुमार, एसआई विनोद कुमार त्यागी, सिपाही भूपेंद्र सिंह, सिपाही कृष्णवीर सिंह, सिपाही अनिरुद्ध, सिपाही दीपक कुमार, महिला सिपाही अपेक्षा तोमर व महिला सिपाही निधि के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। नामजदों में शामिल दरोगा विनोद कुमार त्यागी के सेवानिवृत्त हो चुके है जबकि अन्य दस पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था।
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पिता को 11, भाई को नौ और रिश्तेदार को जेल में काटने पड़े थे 15 महीने
लापरवाह पुलिसकर्मियों की वजह से निर्दोष पिता को करीब 11 माह, भाई को करीब 9 माह और रिश्तेदार को करीब एक वर्ष तीन महीने जिला कारागार में गुजारने पड़े थे।
कोर्ट ने पुलिस को बताया था आपराधिक षड्यंत्रकारी
पिता-पुत्र को ऑनर किलिंग के गलत आरोप में जेल भेजने के कृत्य को जिला जज की अदालत ने पुलिस का आपराधिक षड्यंत्र बताया था। तल्ख टिप्पणी करते हुए स्पष्ट कहा था कि विवेचक और अन्य पुलिस कर्मियों ने षड्यंत्र कर कूटरचित साक्ष्य गढ़े हैं। पूरे प्रकरण में न्यायालय ने 15 पेज का आदेश जारी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे।
किसी भी मामले में विवेचना पूरी कर 90 दिन में चार्जशीट दाखिल करने का प्रावधान है लेकिन इस मामले में पुलिस पांच साल बाद भी चार्जशीट दाखिल करने का तैयार नहीं है। पुलिस अभियुक्त पुलिसकर्मियों को बचाने की कोशिश कर रही है और उनसे हमसाज हो गई है। पीड़ित ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर चार्जशीट तलब करने की मांग की थी। इस संबंध में 14 नवंबर को कोर्ट ने भी पुलिस को 18 नवंबर तक एफआईआर की प्रगति रिपोर्ट मय केस डायरी समेत प्रस्तुत करने के लिए कहा था, लेकिन पुलिस ने कोर्ट के आदेशों को भी नहीं माना है। मामले में अगली सुनवाई जल्द ही होगी। -कुलदीप चौधरी, अधिवक्ता पीड़ित पक्ष
वर्जन
यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर विवेचना संभल क्राइम ब्रांच कर रही है तो वहीं की पुलिस चार्जशीट दाखिल करेगी। न्यायालय ने कोई आदेश दिए हैं, ऐसा भी कोई पत्र मेरे संज्ञान में नहीं आया है। फिर भी मामले को दिखावा कर कोर्ट के आदेशों का पालन किया जाएगा। - अमित कुमार आनंद, एसपी अमरोहा