नगर पालिका परिषद में नए-नए कारनामे सामने आ रहे हैं। ठेकेदारों को काम से पहले भुगतान करने का मसला अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि संविदा सफाई कर्मियों का ईपीएफ जमा न करने का एक और मसला उजागर हो गया है, जिसमें पालिका प्रशासन फंस गया है।
भविष्य निधि आयुक्त बरेली ने उसका खाता सीज करा दिया है। कर्मचारियों की एक करोड़ 15 लाख रुपये भविष्य निधि जमा करने के बाद ही अब उसको खोला जाएगा। अचानक हुई इस कार्रवाई से एक ओर जहां कर्मियों का मानदेय नहीं मिल पा रहा है, वहीं ठेकेदारों के कार्यों का पेमेंट भी लटक गया है। अधिकारी खाते को शुरू कराने की कार्रवाई में जुट गए हैं।
कई साल से अमरोहा नगर पालिका में संविदा सफाई कर्मचारी काम को अंजाम देते चले आ रहे हैं। इनके मानदेय में से ईपीएफ कटौती होती है। कई माह से पालिका अधिकारी उसको काटते चले आ रहे थे, लेकिन भविष्य निधि आयुक्त बरेली के कार्यालय में उसको जमा नहीं कर रहे थे।
धीरे-धीरे कर्मचारियों का ईपीएफ एक करोड़ की राशि को पार कर चुका है। यहां बता दें कि आयुक्त ने संविदा कर्मियों का वर्ष 2011 से 2016 तक का ईपीएफ जमा करने के लिए नगर पालिका प्रशासन से कहा था। यह ईपीएफ अब एक करोड़ 15 लाख रुपये हो चुका है।
बार-बार चेताने के बाद भी जब पालिका अफसरों ने उस पर गौर नहीं किया तो आयुक्त गंभीर हो गए। उन्होंने लगभग एक हफ्ते पूर्व तत्काल प्रभाव से पालिका का खाता सीज करने का आदेश जारी कर दिया। बताते चलें कि जिस खाते को आयुक्त के आदेश पर सीज किया गया है, वह भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा में है।
इससे ही कर्मियों को मानदेय का भुगतान किया जाता है और ज्यादातर पालिका के कार्यों की धनराशि भी उसमें ही आती है। खाता सीज होने के बाद से अधिकारियों व कर्मचारियों में हड़कंप मचा है। धनराशि के अभाव में कोई भी काम पालिका प्रशासन ठीक से नहीं करा पा रहा है।
ठेकेदारों को नहीं होगा कोई भुगतान
अमरोहा। संविदा कर्मचारियों का ईपीएफ जमा नहीं होने की वजह से पालिका का खाता सीज हो गया है, जिसके बाद से अधिकारियों में खलबली है। अधिकारियों ने स्पष्ट कह दिया है कि जब तक खाता नहीं खुलेगा तब तक किसी भी ठेकेदार को कार्य का पेमेंट नहीं किया जाएगा। इधर ठेेकेदार भी नगर पालिका कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन किसी को भी राहत नहीं मिल पा रही है।
खाता सीज होने से ठहरे काम
अमरोहा। नगर पालिका परिषद का खाता सीज होने के बाद से तमाम कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इनमें संविदा कर्मियों का मानेदय भी नहीं मिल रहा है। इसके अलावा पालिका मद में खर्च की जाने वाली धनराशि भी नहीं निकाली जा रही है। इसके चलते कर्मचारियों को भारी दिक्कत हो रही है।
पहले ईपीएफ जमा करने का कोई शासनादेश नहीं था, लेकिन अब एकाएक कई साल का ईपीएफ जमा करने के लिए कहा गया है। एक करोड़ 15 लाख रुपये जमा किए जाने हैं। न करने पर ही खाता सीज हुआ है, जिसको शुरू करने के लिए पैरोकारी की जा रही है।
मनोज रस्तोगी, ईओ नगर पालिका परिषद