अमरोहा वन प्रभाग के शहजादपुर गांव के जंगल में 17 फरवरी को दो शावक मिलने के 14 दिन बाद तेंदुआ देखा गया। सिंचाई कर रहे लोगों ने खेतों से गुजरते हुए तेंदुए को देखा, जिससे उनमें दहशत है। सूचना पर भी वन कर्मचारी या अधिकारी गांव में नहीं पहुंचा।
शहजादपुर गांव निवासी मोनिका शुक्रवार सुबह छह बजे खेत पर काम कर रही थी। इसी दौरान उसे तेंदुआ पड़ोस के खेत में दिखा। मोनिका ने तेंदुआ होने की जानकारी गांव में दी। इस पर लोग खेत पर पहुंचे। काफी देर तक देेखते रहे, लेकिन तेंदुआ नहीं दिखा। लोगों को भरोसा नहीं हुआ कि तेंदुआ था।
अपराह्न तीन बजे गांव की साक्षी खेत में सिंचाई कर रही थी। इसी दौरान उसे भी तेंदुआ दिखाई दिया। उसके शोर मचाने पर गांव के लोग फिर जंगल में पहुंचे। ग्रामीणों ने खेतों में काफी देर तक खोजबीन की, लेकिन तेंदुआ नहीं मिला। गांव के ही गजेंद्र सिंह शाम छह बजे खेत पर फसलों की सिंचाई कर रहे थे।
अचानक उनकी नजर दूर खेतों में खड़े तेंदुए पर पड़ी। गजेंद्र ने गांव में जाकर बताया, जिस पर ग्रामीण मौके की ओर दौड़े। सूचना पर भी वन कर्मचारी या अफसर गांव में नहीं पहुुंचा। इस संबंध में डीएफओ और वन क्षेत्राधिकारी से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।
गांव के जंगल में मिले थे शावक
17 फरवरी की अपराह्न साढ़े तीन बजे शहजादपुर गांव के जंगल में तेंदुए के दो शावक पाए गए थे। वन विभाग के अफसरों और कर्मचारियों ने लापरवाही का परिचय देते हुए जंगल में मादा तेंदुए की खोजबीन नहीं की थी, जो कि पास के खेेतों में ही छिपी थी। शावकों को वन विभाग के कर्मचारी रेंज कार्यालय ले आए। प्राथमिक उपचार के बाद शावकों को कानपुर प्राणी उद्यान भेज दिया गया। उधर बच्चों के वियोग में मादा तेंदुआ खेतों में भटकती रही। कई दिन तक उसके गुर्राने की आवाज सुनी गई।