अमरोहा। ईद उल अज्हा यानी बकरीद का चांद दो अगस्त को देखा जाएगा। कुर्बानी के लिए बकरा मंडी भी सज गई है। चांद के दीदार के साथ 12 अगस्त से कुर्बानी का सिलसिला शुरू होगा। वरना 13 अगस्त से जानवरों की कुर्बानी दी जाएगी, यह सिलसिला तीसरे दिन मगरिब की अजान के पहले तक चलेगा। कुर्बानी के लिए कई नस्ल के बकरे बाजार में मौजूद हैं। जिनकी कीमत 10 हजार से लेकर 40 हजार रुपये तक है। सबसे अधिक देसी और तोतापरी नस्ल के बकरों की मांग है।
इस्लामिक मान्यता के अनुसार, हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की कुर्बानी की याद में हर साल जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। अल्लाह तआला कुर्बानी करने वाले की नीयत देखता है। इस्लाम के पांच अरकान में हज भी शामिल है जिसकी अदायगी सऊदी अरब में होती है। नमाज के बाद हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के कुर्बानी की याद में जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। जिले में भी बकरों की कुर्बानी की जानी है। इसके लिए कुर्बानी का बाजार सज गया है। शहर के दानिश मंदान पेट्रोल पंप के सामने बुधवार को बकरा मंडी में चहल पहल रही। यहां पर सुबह नौ बजे से दूर दराज से बकरा बेचने वाले लोग आ गए। उन्होंने जानवरों को कीमत तय कर रखी थी। यहां पर 10 से 40 हजार रुपये के बकरे मौजूद रहे। दिन में 12 बजे तक चहल पहल रही। कुछ लोगों ने बकरों के जोड़े खरीदे।
आज जीकाद की 28 तारीख
अमरोहा। इस्लामिक महीना जीकाद की गुरुवार को 28 तारीख है। इस्लामिक महीना 29 अथवा 30 दिन का होता है। ऐसे में बकरीद के चांद की गुंजाइश दो अगस्त को भी है। चांद के दीदार होने के बाद 12 अगस्त से ईद उल अज्हा शुरू हो सकता है।