पाकबड़ा क्षेत्र के एक गांव का बुखार पीड़ित व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ गुरुवार को अस्पताल दवाई लेने आया। जहां डाक्टरों ने उसका परीक्षण किया और दवाई लिख दी। खराब हालत होने पर पत्नी बार-बार पति को भर्ती करने की गुहार लगाती रही, मगर किसी ने एक न सुनी।
बुखार से बेदम हुआ पति अस्पताल परिसर में ही बाहर की ओर जमीन पर लेट गया। डाक्टर व स्टाफ की संवेदनहीनता को देखकर पत्नी की आंख से आंसू बहने लगे। इसी दरम्यान पहुंचे मीडिया कर्मियों को देखते ही एकाएक स्टाफ हरकत में आया। उसको उठवाकर इमरजेंसी में लिटाते हुए ड्रिप चढ़ाई और एडमिट कर लिया।
गांव समातल निवासी रमजानी को बीते कई दिनों से बुखार है। प्राइवेट डाक्टर की दवाई से उसको कोई फायदा नहीं हुआ। लोगों के बताने पर वह गुरुवार को अपनी पत्नी जैतून जहां के साथ अमरोहा के जिला अस्पताल में पहुंचा। जैसे तैसे पत्नी ने पर्चा बनवाया।
इसके बाद पति को लेकर ओपीडी में बैठे चिकित्सक के पास पहुंची। यहां डाक्टर ने तबियत देखते हुए दवाई लिखी और औषधि वितरण केंद्र से लेने को कहा। पत्नी ने पति को बेंच पर बैठा दिया। दवाई लेकर जब वह वापस आई तो पति की हालत और बिगड़ गई थी।
इस पर उसने डाक्टरों व स्टाफ से पति को भर्ती करने के लिए तमाम मिन्नतें कीं, किन्तु किसी ने नहीं सुनी। इसके बाद वह बुखार में तप रहे पति को लेकर बाहर आई। स्थिति गंभीर होने पर उसको कपड़ा बिछाकर अस्पताल परिसर में ही जमीन पर लिटा दिया और रोने लगी।
थोड़ी देर बाद ही वहां पहुंचे मीडिया कर्मियों ने महिला से मालूमात शुरू की तो भीड़ जमा होते देख स्टाफ में खलबली मच गई। आननफानन में उसको जमीन से उठाकर इमरजेंसी कक्ष में दाखिल कर लिया। ड्रिप लगाते हुए उपचार करने लगे।
ऐसा कोई मामला संज्ञान में नहीं है। जो बुखार में गंभीर मरीज आ रहे हैं, उनको भर्ती किया जा रहा है। यदि शिकायत आएगी तो जांच कर कार्रवाई होगी। मैं खुद अपना नंबर इमरजेंसी व वार्ड में लिखवा देता हूं। अगर किसी को डाक्टर से शिकवा है तो वह बता सकता है, जिसका निस्तारण किया जाएगा।
डा. पीके बंसल, सीएमएस