अमरोहा। शहर के जाने-माने चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. शिव कुमार के अचानक लापता होने से परिजनों और चिकित्सा जगत में भी हड़कंप मच गया। शुक्रवार सुबह घर से अस्पताल के लिए निकले डॉक्टर न तो अपने अस्पताल पहुंचे और न ही वापस घर लौटे। उनका मोबाइल फोन भी बंद आ रहा था, जिससे परिजन बेहद परेशान हो गए। शाम को चार बजे उनकी पत्नी ने देहात थाने में तहरीर देकर गुमशुदगी दर्ज कराई। इसके बाद हरकत में आई पुलिस ने एसओजी व सर्विलांस टीम की मदद से साढ़े चार घंटे की तलाशी के बाद देर शाम साढ़े आठ बजे उन्हें ढूंढ लिया। वह अपने घर से सुबह 11 बजे निकलने के बाद से ही लापता थे। देर रात तक पुलिस डॉक्टर के लापता होने की असली वजह तलाशने के जुटी रही।
मूलरूप से संभल जनपद के बहजोई निवासी डॉ. शिव कुमार साल 2014 से अपनी पत्नी टीना और दो बच्चों के साथ जोया रोड स्थित ग्रीन कॉलोनी में रहते हैं। मोहल्ला जयओम नगर में वह प्रकाश चिल्ड्रन हॉस्पिटल नाम से अस्पताल चलाते हैं, जबकि जोया रोड पर एक नया क्लीनिक निर्माणाधीन है। साथ ही वह संविदा पर जिला अस्पताल में प्रैक्टिस करते हैं। तहरीर के मुताबिक शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे डॉ. शिव कुमार अपनी कार से अस्पताल के लिए निकले थे लेकिन इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला। जब काफी देर तक डॉक्टर अस्पताल नहीं पहुंचे तो उनकी तलाश शुरू की गई। घर से लेकर अस्पताल तक हर जगह खोजबीन की गई लेकिन न तो डॉक्टर का कोई सुराग मिला और न ही उनकी कार का पता चल सका। मोबाइल फोन बंद होने के कारण संपर्क भी नहीं हो पाया।
घटना से चिंतित पत्नी टीना ने अमरोहा देहात थाने में तहरीर देकर पति की गुमशुदगी दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस से जल्द कार्रवाई कर डॉक्टर को सकुशल बरामद करने की गुहार लगाई थी। उधर, डॉक्टर के अचानक लापता होने की खबर से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के पदाधिकारी भी हैरान हो गए। एसपी लखन सिंह यादव ने डॉक्टर की तलाश के लिए एसओजी व सर्विलांस समेत तीन टीमें लगाईं। मोबाइल नंबर बंद होने के कारण लोकेशन ट्रेस करने में कुछ दिक्कत आई। लेकिन, रात करीब साढे आठ बजे डॉक्टर शिव कुमार का फोन चालू हुआ। पुलिस ने लोकेशन के आधार पर शिवानी बैंक्वट हॉल के पास उन्हें ढूंढ निकाला। एसपी लखन सिंह ने बताया कि डॉक्टर को सकुशल ढूंढ लिया गया है। वह कुछ बताने की स्थित नहीं थे। उनके लापता होने की असली वजह का पता लगाया जा रहा है।
सीडीआर में नहीं मिले थे संदिग्ध नंबर
डॉ. शिव कुमार की तलाशी के लिए तीन टीमें साढ़े चार घंटे तक जुटी रहीं। इस बीच कोई क्लू हाथ नहीं लगा। डॉक्टर के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) निकलवाई गई है, जिसमें फोन बंद होने से पहले जिन लोगों से उनकी बातचीत हुई, वह सभी उनके परिचित पाए गए। सीडीआर में किसी भी प्रकार का संदिग्ध नंबर सामने नहीं आया। पुलिस जिला अस्पताल स्टाफ, उनके निजी क्लीनिक स्टाफ और परिवार से जुड़े सभी पहलुओं की गहनता से जांच की। लेकिन, करीब साढ़े आठ बजे फोन ऑन होने पर पुलिस को उनकी लोकेशन मिल गई।