इससे क्षेत्र के लोग दहशतजदा हैं। गांव में दस लोग लकवाग्रस्त हो चुके हैं। इनमें कई दंपति लकवे का शिकार होने के कारण न चल फिर सकते हैं न ही बोल सकते हैं। लकवे की वजह भूगर्भ जल का दूषित होना माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व कूबी गांव में कैंसर से दो साल में 10 मौतों का खुलासा अमर उजाला ने किया था।
अमरोहा शहर और आसपास के क्षेत्र में कई काटनवेस्ट इकाई लगी हैं।
इनमें कपड़े के कत्तरों की धुलाई के लिए वाशिंग प्लांट लगे हैं। यहां घातक केमिकल से कत्तरों की धुलाई करके केमिकल के पानी रूपी जहर को बोरिंग के जरिये जमीन में डाले जाने से भू-गर्भ जल जहरीला होता जा रहा है। जांच रिपोर्टों के मुताबिक भू-गर्भ जल के अत्यधिक प्रदूषित होने के कारण हैंडपंपों भी दूषित पानी उगल रहे हैं। इनका पानी पीने से कैंसर और लकवा जैसी गंभीर बीमारयिां पनप रही हैं।
हालांकि अधिकारी इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं। जोया ब्लाक के गांव कूबी में कैंसर से पीड़ित होकर 10 लोगों के दो साल के भीतर मरने के बाद अब उमरी जानिवगर्व के ग्रामीण भी लकवे और कैंसर से दो साल में 11 लोगों के मरने और दस परिवारों के पीड़ित होने से दहशत में हैं। यहां तेजपाल पुत्र नौरंग सिंह, पूरन व चेतराम सगे भाइयों पुत्रगण शिव्वा, चेतिया पत्नी डूंगर सिंह, श्यामलाल पुत्र रामचंद्र, लाल सिंह पुत्र चेतराम समेत छह लोगों की लकवे से दो साल के भीतर मौत हो चुकी है।
जबकि इसी दौरान कैंसर से नानक सिंह, कन्हैया लाल, धर्मवीर, जगदीश सिंह और दौलत सिंह की मौत हो गई।
इन बीमारियों की वजह हैंडपंपों का खराब पानी ही बताया जा रहा है। लकवे की चपेट में मुरादाबाद स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत तेजपाल सिंह, विरेश व उसकी पत्नी रेखा, सोमपाल व उसकी पत्नी, हरज्ञान सिंह व इनकी पत्नी श्यामवती, बबलू, सोनू और विकुल भी हैं। लकवे से किसी के शरीर का निचला हिस्सा, किसी के मुंह और हाथ-पैरों पर असर हुआ है।