अमरोहा/डिडौली। कागजों में मॉडल डिडौली व चौधरपुर गांवों की जमीनी हकीकत बेहद खराब है। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी दोनों गावों के लोग बदहाली की जिंदगी जी रहे हैं। कहीं सड़कें टूटी हैं तो जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। कूड़ा निस्तारण केंद्र है लेकिन निष्क्रिय। सार्वजनिक शौचालय की स्थिति भी दयनीय है। गांव के बुजुर्गों व विधवाओं को पेंशन नहीं मिल पा रही है। दर्जनों गरीब परिवारों को पीएम आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका और ये कच्चे मकान में रहने को मजबूर है।
गांवों के विकास लिए सरकार हर साल बड़ा बजट खर्च करती है जो गांव में सड़क-नाला निर्माण, कूड़ा निस्तारण केंद्र समेत स्वच्छता पर खर्च किया जाता है। कुछ गांवों को मॉडल बनाने के लिए गांव में कई कार्य किए गए लेकिन इसके बाद भी इन गांवों की स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख पा रहा है।
जोया ब्लॉक के गांव डिडौली को भी मॉडल गांव के रूप में तैयार करते हुए विकास कार्य कराए जाने के दावे किए जाते रहे लेकिन यहां की बदहाल हालत किसी से छिपी नहीं है। मुख्य मार्गों पर जगह-जगह लगे गंदगी के ढेर सफाई व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहे हैं। इसके अलावा चौधरपुर में भी सफाई व्यवस्था समेत विकास कार्यों की स्थिति ठीक नहीं है। 37 लाख खर्च करने के बाद भी गांव की स्थिति में बदहाल है। पथ प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए गांवों में लाइटें लगवाई गईं लेकिन खराब होने के बाद भी इन्हें ठीक नहीं कराया जा सका है। सफाई के मामले में डिडौली पंचायत को प्रदेश में 14वां स्थान प्राप्त हुआ था लेकिन सफाई के यह आंकड़ें केवल कागजों तक ही सीमित रहे जबकि मौके पर बदहाल सफाई व्यवस्था इन आंकड़ों की पोल खोल रही है।
बंद पड़े कूड़ा निस्तारण केंद्र
कूड़ा निस्तारण के लिए डिडौली व चौधरपुर गांवों में कूड़ा निस्तारण केंद्र यानी आरआरसी का निर्माण कराया गया था लेकिन संचालन के अभाव में यह कूड़ा निस्तारण केंद्र खुद ही कूड़ा होने लगे। चौधरपुर में कूड़ा निस्तारण केंद्र पर पिछले काफी समय से ताला लगा है। उधर, न तो गांवों में घर-घर से कूड़ा इकट्ठा किया जा रहा है, और न ही निस्तारण केंद्र पर ही कुछ कार्य हो पा रहा है।
सार्वजनिक शौचालय भी बदहाल
सफाई व्यवस्था के अभाव में गांवों में सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति भी ठीक नहीं है। चौधरपुर में शौचालय में गंदगी पसरी होने के कारण लोग उनका इस्तेमाल करना भी पसंद नहीं करते हैं। लोगों ने नियमित सफाई कराए जाने की मांग की है।
तालाब के किनारे भी गंदगी का अंबार
डीएम की ओर से भले ही तालाबों के जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण की मुहिम चलाई जा रही है लेकिन चौधरपुर में तालाब गंदगी से अटा हुआ है। इसके किनारे कूड़े के ढेर लगे हैं। दुर्गंध के कारण लोगों को वहां से निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
शोपीस बना ओवरहेड टैंक
स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के लिए चौधरपुर गांव में ओवरहेड टैंक का निर्माण कराया गया था। सड़कों को तोड़कर पाइपलाइन भी बिछा दी गई लेकिन अभी तक पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़कों को तोड़ा तो गया लेकिन इनको बाद में मरम्मत नहीं किया गया जिससे लोगों को निकलने में भी परेशानी का सामना पड़ता है।
- सभी पंचायतों में साफ-सफाई की व्यवस्था को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। अगर कहीं सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है, तो उसके लिए निर्देश देते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - पारुल सिसोदिया, डीपीआरओ