देवोत्थान एकादशी पर मंगलवार तड़के से गंगा में स्नान का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाते हुए गंगा मैया के जयकारे लगाए। सुरक्षा के मद्देनजर गहराई वाले स्थानों को चिह्नित करने के लिए बल्लियां लगाई गईं हैं। वहीं, घाटों पर रोशनी की व्यवस्था भी रही। उधर, दिनभर श्रद्धालु गंगा में अठखेलियां भी करते नजर आए। इनमें महिलाओं, युवतियों और बच्चों की संख्या अधिक रही। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने दान भी दिया। गंगा में पुष्प भी अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
देवोत्थान एकादशी के साथ शुरू हुए मांगलिक कार्य
देवोत्थान एकादशी को लेकर मान्यता है कि भगवान विष्णु क्षीर सागर में चार महीने की निंद्रा के बाद कार्तिक मास की एकादशी के दिन जागते हैं। इनके जागने के बाद से सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य फिर से आरंभ हो जाते हैं। देवोत्थान एकादशी के दिन तुलसी जी का शालीग्राम के सात विवाह किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति को कन्या नहीं है और वह जीवन में कन्या दान का सुख प्राप्त करना चाहता है। तो वह तुलसी विवाह कर प्राप्त कर सकता है। मंगलवार को शादी व अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत भी हो गई।