गजरौला (अमरोहा)। देवोत्थान एकादशी पर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहने वाला तिगरी के गंगा घाट पर आज सन्नाटा पसरा हुआ था। न पंडितों-पुरोहितों की झोपड़ियां न प्रसाद बेचने वाले। श्रद्धालुओं से पटे रहने वाले घाट बुधवार को सूने पड़े थे। कोरोना संक्रमण के चलते शासन ने गंगा स्नान पर प्रतिबंध लगा रखा है। पुलिस प्रशासन की सख्ती के चलते श्रद्धालु घाट तक भी नहीं पहुंच सके। वहीं घाटों से पंडित-पुरोहितों के तख्त और झोपड़ी हटाए जाने से इस पेशे से जुड़े लोग मायूस हैं।
बुधवार को देवोत्थान एकादशी थी। इस दिन वर्ष भर सोए देवता जागते हैं। इसलिए शुभ कार्यों के लिए देवोत्थान एकादशी के पर्व का विशेष महत्व है। गंगा में स्नान का भी पौराणिक महत्व बताया गया है। हालांकि इस बार कोविड-19 को देखते हुए शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने यहां तिगरी में लगने वाले राजकीय मेले पर भी रोक लगाई हुई है। इसी के चलते तिगरी आने वाले मार्गों पर पुलिस तैनात की गई थी। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं की पुलिस से नोकझोंक भी हुई। वहीं पुलिस की सख्ती के चलते गंगाधाम तिगरी में गंगातट पर सन्नाटा पसरा रहा। पंडित गंगासरन शर्मा ने बताया कि सुबह के समय 10-15 लोग स्नान को जरूर आए थे। इसके बाद कोई नहीं पहुंचा। उन्होंने बताया कि इस बार घाट से पंडितों के तख्त भी हटा दिए गए हैं। इस कारण उनकी रोजी-रोटी पर भी संकट आ खड़ा हुआ है। वहीं कार्यवाहक इंस्पेक्टर (अपराध एवं कानून) वीरेश कुमार ने बताया कि लोग जागरूक हो रहे हैं। यही वजह है कि तिगरी में देवोत्थान एकादशी पर भीड़ जुटी ही नहीं। उन्होंने बताया कि फिर भी तिगरी में श्रद्धालुओं को जाने से रोकने के लिए फोर्स तैनात की गई है।