मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने ब्रजघाट और तिगरी गंगा में स्नान कर पुण्य कमाया। डुबकी लगाने के बाद गंगा किनारे धार्मिक अनुष्ठान कराए। दोनों स्थानों पर रविवार तड़के से ही स्नान का सिलसिला शुरू हो गया था।
तिगरी निवासी पंडित गंगाशरण शर्मा और बुध बाजार स्टेशन रोड निवासी पंडित दयानंद शर्मा के मुताबिक मार्गशीर्ष माह (अगहन) की पूर्णिमा को आनंद पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस पूर्णिमा पर व्रत करने से 32 पूर्णिमा के बराबर पुण्य मिलता है। पूर्णिमा पर गंगा में स्नान कर दान करने से श्रद्धालुओं पर भगवान श्रीकृष्ण की कृपा बनी रहती है। रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा तट पर उमड़े। सूर्य निकलते से पहले ही श्रद्धालुओं ने हर हर गंगे के उद्घोष संग पतित पावनी के जल में डुबकी लगाई।
गंगा मैया के जयकारे और हर-हर गंगे के उद्घोष से ब्रजघाट और तिगरी गंगा तट गूंज उठे। गंगा में तड़के शुरू हुआ स्नान का सिलसिला काफी देर तक का चलता रहा। गंगा में स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठान कराए। पुरोहितों और ब्राह्मणों को दान दक्षिणा देकर तृप्त किया।