कार्तिक पूर्णिमा पर 15 नवंबर को मुख्य गंगा स्नान होगा। इसके लिए श्रद्धालु का तिगरी गंगा मेले में पहुंचने का सिलसिला जारी है। वहीं, कुछ श्रद्धालु बृहस्पतिवार को तिगरीधाम पहुंचेंगे। इस दिन सूर्यास्त के समय गंगा घाट पर स्नान कर गंगा में दीपदान कर पितरों का तर्पण किया जाएगा। पंडित आशुतोष त्रिवेदी ने बताया कि मान्यता है कि महाभारत युद्ध में मारे गए हजारों सैनिक और असंख्य योद्धाओं की आत्मा शांति के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों की मौजूदगी में सर्वप्रथम चतुर्दशी को दीपदान किया था, तब से यह परंपरा चल रही है।
कार्तिक पूर्णिमा पर तिगरीधाम पर लगने वाले ऐतिहासिक मेले के मुख्य स्नान से एक दिन चतुर्दशी पर लोग अपने पितरों का तर्पण करते हैं। यह दीपदान वहीं लोग करते हैं, जिनके सगे संबंधी एक वर्ष के अंदर उन्हें छोड़कर परम पिता परमेश्वर की शरण में चले गए हैं। गंगा में स्नान करने के बाद सूर्यास्त के समय दीपदान करें। इसके बाद भी गंगा में स्नान करें। साथ ही खाना और दक्षिणा दान करें। कार्तिक मेले के दौरान गंगा में दीपदान करने मृत आत्माओं को शांति मिलती है। तिगरीधाम मेला पश्चिमी यूपी का सबसे बड़ा मेला माना जाता है। यहां मुरादाबाद, बरली, लखनऊ मंडल के अलावा दिल्ली एनसीआर क्षेत्र के श्रद्धालु गंगा स्नान और दीपदान के लिए आते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है।