जिले में ‘कागजी विकास’ का एक और मामला सामने आया है। एप्रोच रोड बनाए बगैर लोकार्पण कराए जाने के बाद अब तीन और गैर बनी सड़कों का लोकार्पण कराए जाने ककी चर्चा है। हैरत की बात है कि इन सड़कों का भी लोकार्पण कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव से ही कराया गया है। जबकि मौके पर यह सड़कें या तो उबड़-खाबड़ हैं या इन पर काम ही नहीं शुरू कराया गया है।
लोक निर्माण विभाग की ओर से जिले में कई अरब रुपये की लागत से सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। अधिकांश सड़कें नाबार्ड, राज्य सड़क निधि से बनाई जा रही हैं। लेकिन, जिले के चारों विधानसभा क्षेत्रों में माननीयों ने अपने-अपने हिसाब से काम कराए हैं। 28 मार्च को लोक निर्माण विभाग के कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव के अमरोहा आगमन पर उनसे 18 सड़क परियोजनाओं का लोकार्पण और 14 सड़क परियोजनाओं का शिलान्यास कराया गया था।
जिन सड़कों का लोकार्पण कराया गया था उन पर सवाल उठने लगे हैं। अमर उजाला की टीम ने मौका मुआयना कर जिले में सर्वाधिक लागत 16 करोड़ से बनने वाली स्याना (बुलंदशहर) रोड पर गंगा नदी के पुल से हसनपुर-गवां तक बनने वाली एप्रोच रोड का खुलासा कर दिया है। इस सड़क का लोकार्पण करा दिया गया था। मौके पर सिर्फ एक किलोमीटर ही सड़क बनी है। जबकि कम से कम सड़क 10 किलोमीटर की बननी है।
जिले की तीन और ऐसी सड़कें अमर उजाला टीम को बिना बनी हुई मिली हैं। इनका लोकार्पण भी शिवपाल यादव से ही कराया गया था। इनमें नाबार्ड से बनने वाली लालू नगला-कुमखिया-चककालीलेट मार्ग, डिडौली-कैलसा स्योंडाला फरीदपुर मार्ग और धनौरा अमरोहा कांठ मार्ग के 21 किलोमीटर से कूड़ा माफी मार्ग भी अधबने पड़े हैं। इन हालात में क्षेत्र की जनता जर्जर मार्ग से गुजरने को मजबूर है जबकि कागजों में बनकर इनका लोकार्पण भी करा दिया गया है।