सोमवती अमावस्या पर ब्रजघाट में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
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गजरौला। सोमवती अमावस्या पर ब्रजघाट और तिगरी में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। दोनों स्थानों पर लाखों श्रद्धालुओं ने पतित पावनी गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य कमाया। भोर होते ही शुरू हुआ स्नान का सिल सिला काफी देर तक चलता रहा। सुहागिन महिलाओं ने पतियों की दीर्घायु के लिए व्रत रखा। वट और बरगद वृक्ष की पूजा की।
तिगरी निवासी पुरोहित पंडित गंगा शरण शर्मा के मुताबिक ज्येष्ठ माह की अमावस्या को वट अमावस्या कहा जाता है, लेकिन इस बार सोमवार को पड़ने के कारण इसे सोमवती अमावस्या भी कहा गया। वट अमावस्या पर गंगा में स्नान और दान करने का विशेष महत्व माना जाता है। जिसके कारण तिगरी और ब्रजघाट में लाखों श्रद्धालुओं ने पतित पावनी गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य कमाया। पुरोहितों को दान दक्षिणा देकर तृप्त किया। जहां ब्रजघाट में आधी रात के बाद से ही स्नान का क्रम शुरू हो गया था, वहीं तिगरी में तड़के से ही श्रद्धालु गंगा में स्नान करने को जुट गए थे। स्नान का सिलसिला काफी देर तक चलता रहा। उधर वट अमावस्या पर सुहागिन महिलाओं ने पतियों की लंबी आयु की कामना के लिए वट और बरगद वृक्ष की पूजा की। शगुन के तौर पर पत्ते तोड़कर ले गईं। उनकी पूजा अर्चना की गई। पूजा अर्चना के बाद व्रत खोला।
वट अमावस्या मनाई गई
मंडी धनौरा। वट अमावस्या बहुत ही श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा अर्चना की और अपने सुहाग की जीवन की रक्षा की प्रार्थना की। सोमवार को वट अमावस्या का पर्व मनाया गया। मंदिरों में लगे वट वृक्ष की पूजा अर्चना की। सावित्री द्वारा अपने पति सत्यवान का जीवन दोबारा से प्राप्त करने पर महिलाओं ने सावित्री का स्मरण किया। महिलाओं ने बायना निकाला और गरीबों को भोजन आदि भेंट किया। संवाद