गजरौला (अमरोहा)। सिंचाई विभाग के ठेकेदार देवऋषि उर्फ दीपक जाटव (42) का शव अपने ही ऑफिस में पड़ा मिला। दीपक के चालक इंद्रपाल सैनी (40) का शव भी पास पड़ा था। मुंह से झाग निकलने से दोनों की जहर से मौत मानी जा रही है। हालांकि शवों से कुछ दूरी पर स्टार्ट खड़ी सेंट्रो कार के हवाला देते हुए पुलिस ने ऑक्सीजन की कमी से मौत का अनुमान जताया है। पोस्टमार्टम में कारण स्पष्ट न होने से विसरा प्रिजर्व किया गया है।
शहर के शुक्लपुरी मोहल्ले के रहने वाले ठेकेदार दीपक का ऑफिस गजरौला के अवंतिका नगर में ललिता देवी मंदिर मार्ग पर है। उनका चालक इंद्रपाल गांव चौबारा का रहने वाला था। ज्ञान भारती इंटर कॉलेज से सेवानिवृत्त शिक्षक अतरपाल सिंंह जाटव के बेटे दीपक का ठेकेदारी का काम संभल, बहजोई समेत कई स्थानों पर चल रहा है। उनके ऑफिस परिसर में ही अतरपाल सिंह का ट्रस्ट का कार्यालय भी है।
दीपक के भांजे विवेक बैंक कॉलोनी में रहते हैं। विवेक ने बताया कि बुधवार को दिन में घर से निकले मामा के रात तक घर न आने पर परिजनों ने कई बार फोन किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। इस पर बृहस्पतिवार सुबह उनकी मौसी हेमलता का फोन आया, जिन्होंने दीपक के ऑफिस जाकर हालात जानने के लिए कहा। वह सुबह छह बजे के आसपास अपने मामा के ऑफिस पहुंचे।
लगभग 60 गज के दोमंजिला भवन में ग्राउंड फ्लोर पर बने आफिस के कमरे से सटे कवर्ड हॉल जैसे बरामदे में मामा दीपक का शव जमीन पर पड़ा था। पैरों का कुछ हिस्सा बाथरूम में था। पास में ही चालक इंद्रपाल का शव पड़ा था। दोनों के मुंह से झाग निकल रहे थे। हैरानी की बात है कि बरामदे में ही दीपक की सेंट्रो कार स्टार्ट खड़ी थी। पास में ही दीपक स्कॉर्पियो भी थी जो स्टार्ट नहीं थी। विवेक की सूचना पर पहले परिजन और फिर पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचे।
सीओ श्वेताभ भास्कर ने बताया कि पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। विसरा प्रिजर्व किया है, जिसे जांच के लिए भेजा जाएगा। पुलिस का कहना है कि चारों तरफ से बंद परिसर में लगातार स्टार्ट सेंट्रो खड़ी रहने से ऑक्सीजन की कमी हो गई हो और दम घुटने से दोनों की जान चली गई हो। सीओ का कहना है कि फोरेंसिक टीम ने भी मौके से कुछ नमूने लिए हैं। उनकी ओर विसरा की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। दूसरी ओर वारदात से गम में घिरा परिवार अभी कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है। हत्या या हादसे की आशंका पर भी खामोशी है।
हत्या....हादसा....या कुछ और
- गजरौला में अपने दफ्तर में ठेकेदार और उनके चालक के मृत मिलने का मामला
- लोगों के गले नहीं उतर रही कार स्टार्ट खड़ी होने से ऑक्सीजन घट जाने की बात
संवाद न्यूज एजेंसी
गजरौला। नगर में सेवानिवृत्त शिक्षक के बेटे एवं ठेकेदार दीपक जाटव और उनके चालक इंद्रपाल के संदिग्ध स्थितियों में दफ्तर में मृत मिलने के पीछे की वजह अभी रहस्य बनी हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट न कोई कारण बताने के स्थान पर विसरा जांच का रास्ता दिखा दिया है। परिजनों की खामोशी के बीच पुलिस भी अभी किसी निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंच सकी है।
शुरुआती वजह की तौर पर पुलिस ने अनुमान जताया है कि शवों के पास स्टार्ट खड़ी ठेकेदार की सेंट्रो कार के लगातार धुआं उगलने और इंजन ज्यादा गर्म हो जाने से ऑक्सीजन बर्न हो गई होगी। इस तरह की स्थिति में दम घुटने से जान जा सकती है। ऑक्सीजन वाली बात सही मान भी ली जाए तो सवाल यह उठता है कि दम घुटने की शुरुआत होने के बाद दोनों में से किसी ने बंद परिसर खोलने या बाहर निकलने की कोशिश क्यों नहीं की। साथ ही अभी यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि सेंट्रो ने किसने स्टार्ट की और किस उद्देश्य से की थी।
पोस्टमार्टम करने वाली टीम ने सब कुछ विसरा जांच पर छोड़कर यह भी नहीं बताया कि शवों के फेफड़ों की स्थिति में क्या दम घुटने जैसे कोई संकेत मिले या नहीं। मुंह से झाग निकलने का कारण शरीर में किसी तरह जहर का पहुंचना हो सकता है। जानकार कहते हैं कि अक्सर विसरा भी तभी संरक्षित किया जाता है, जबकि जहर के संकेत हों लेकिन यह स्पष्ट न हो सके कि जहर कौन सा था और उनसे किसी अंग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया।
अभी यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि बुधवार दिन में घर से निकले दीपक की दिनचर्या क्या रही। वह किस समय से अपने दफ्तर में थे। उनके मोबाइल फोन पर आखिरी कॉल किसकी आई और उन्होंने अपनी तरफ से आखिरी कॉल किसे की थी।
अगर कैंपस के हर तरफ से बंद होने के कारण ऑक्सीजन की कमी हुई तो परिसर के खिड़की-दरवाजों की उस वक्त क्या स्थिति थी। स्टार्ट कार की हीट कितनी देर में कितने परिसर को प्रभावित कर सकती है। इस तरह के कई सवाल हैं जिनके जवाब तलाशना जांच टीमों के लिए भी अभी चुनौती हैं।
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बहन ने एक युवक की भूमिका पर उठाए सवाल, पुलिस कर रही पूछताछ
अस्पताल में शव पहुंचने पर दीपक की बहन हेमलता ने फोन न उठाने पर दीपक के साथ उठने-बैठने वाले एक युवक पर सवाल उठाए। सुल्तान नगर निवासी युवक से हेमलता ने पूछा कि दीपक के बारे में पूछताछ के लिए जब रात उसे फोन किया तो उसने क्यों नहीं उठाया। हेमलता की उस युवक से नोकझोंक भी हुई। बाद में पुलिस ने युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। हेमलता की शादी रामपुर में हुई है। वह आजकल पिता के घर आई हुई हैं।
एसपी ने दिए गहन जांच के निर्देश
एक कैंपस में दो शवों की जानकारी पर फोर्स के साथ थानेदार अखिलेश प्रधान मौके पर पहुंचे। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इस बीच सीओ श्वेताभ भास्कर, एएसपी अखिलेश भदौरिया, और एसपी अमित कुमार आनंद ने भी मौके का मुआयना किया। एसपी ने पुलिस को हर एंगल पर गहनता से जांच करने के निर्देश दिए हैं।
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अस्पताल में जुटी रही भीड़
दीपक का शव पहुंचने की जानकारी के साथ सीएचसी पर परिचितों व रिश्तेदारों की भीड़ जुट गई। पूर्व विधायक हरपाल सिंह, पूर्व जिला पंचायत सदस्य महेश प्रधान, मास्टर जयवीर सिंह, रविराज बौद्ध, देवेश शर्मा, वीर सिंह भगत, डॉ.राजीव शुक्ला, डॉ. रविंद्र शुक्ला आदि ने सीएचसी आकर परिजनों को ढाढ़स बंधाया। शाम को पोस्टमार्टम के बाद दोनों शव को तिगरी घाट लाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
अंटी में लगा था रिवॉल्वर, पास में था पर्स
दीपक के पास लाइसेंसी रिवॉल्वर था, जिसे वह अक्सर साथ रखते थे। इंस्पेक्टर अखिलेश प्रधान ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह जब उनका भांजा विवेक ऑफिस पहुंचा तो दीपक की अंटी में लाइसेंसी रिवॉल्वर था। बराबर पर्स रखा था, जिसमें रुपये भी थे।
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बंद था ऑफिस का कैमरा
पुलिस ने बताया कि दीपक के ऑफिस में सीसीटीवी कैमरा है लेकिन वह बंद मिला। बाहरी हिस्से में एक अन्य कैमरे में यह दिखा है कि उनका ड्राइवर रात साढ़े आठ बजे के आसपास बाइक से कैंपस में आया था। बाइक उसने बाहर खड़ी की, जिसमें मिठाई के दो डिब्बे मिले हैं।
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