रेलवे स्टेशन की लाइन-6 पर गुड्स प्लेटफार्म बनाए जाने का काम शुरू हो गया है, लेकिन यह कार्य एक साथ न होकर टुकड़ों में कराया जा रहा है। गुड्स ट्रांसपोर्ट से प्रत्येक महीने होने वाली एक करोड़ से अधिक की आमदनी बरकरार रहे, इसलिए टुकड़ों में कार्य कराने का निर्णय लिया गया है।
औद्योगिक नगरी होने के बावजूद गजरौला रेलवे स्टेशन पर गुड्स प्लेटफार्म नहीं है, जबकि स्टेशन की लाइन-6 पर मालगाड़ियों का ठहराव होता है। जिनसे रेलवे स्टेशन को प्रति वर्ष 15करोड़ से अधिक की कमाई होती है। औद्योगिक इकाइयों में निर्मित खाद पूर्वांचल के गोंडा, बस्ती भेजे जाते हैं, जबकि बाहर जिलों और राज्यों से गेहूं,चावल, यूरिया आदि रासायनिक खाद और पत्थर भी ट्रेन से ही गजरौला में आता है। मगर लाइन-6 पर गुड्स प्लेटफार्म नहीं होने के कारण ट्रेन तक सामान लाने या ले जाने में मालवाहक वाहनों को खासी दिक्कत सामने आती है।
हल्की बूंदाबांदी में पानी भर जाने के कारण सामान लाने या ले जानेवाले ट्रक फंस जाते हैं। इस दिक्कत को दूर करने के लिए लाइन-6 पर गुड्स प्लेटफार्म बनाया जा रहा है, लेकिन निर्माण कार्य चरणबद्घ और टुकड़ों में चल रहा है। रोजाना दस से 15 मजदूर कार्य कर रहे हैं। पहली बार में एक सौ मीटर प्लेटफार्म बनाया जा रहा है।
गुरुवार को आधा दर्जन मजदूर कार्य करने में लगे रहे, जबकि ट्रैक्टर प्लेटफार्म स्थल को समतल करने में लगा रहा। स्टेशन अधीक्षक देवेंद्र सिंह का कहना है कि रेलवे लाइन-6 पर रोजाना कई तरह का माल लोड किया जाता है और उतारा जाता है। साल भर में 15 करोड़ से अधिक आमदनी होती है। एक साथ गुड्स प्लेटफार्म का निर्माण किया जाने से माल कहां उतरेगा और लोडिंग किया जाएगा। रेलवे का करोड़ों का नुकसान न हो, इसलिए ही टुकड़ों में और चरणबद्घ तरीके से निर्माण कराया जा रहा है। चार महीने में निर्माण कार्य पूर्ण हो जाएगा।