अमरोहा। हरिद्वार और लक्सर में खून की अवैध तस्करी के मामले के बाद स्थानीय स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है। जिले में बिना अनुमति रक्तदान शिविर लगाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि शिविर से पहले स्वास्थ्य विभाग, स्टेट ब्लड ट्रांसमिशन काउंसिल और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। शिविर की तारीख, समय, स्थान और लाइसेंस की प्रति संबंधित ब्लड बैंक व आयोजकों को साझा करनी होगी। नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई की जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत निजी ब्लड बैंक संचालकों को राज्य रक्त संचरण परिषद की वेबसाइट के माध्यम से अनुमति लेनी होगी। इसके बाद ही रक्त संग्रह किया जा सकेगा। प्रत्येक शिविर में जिला ब्लड बैंक की टीम की मौजूदगी भी अनिवार्य होगी।
सीएमओ डॉ. रमाकांत सागर ने बताया कि निजी ब्लड बैंकों को एक-एक यूनिट रक्त का पूरा हिसाब देना होगा। हर 15 दिन में रिपोर्ट देनी होगी, जिसमें एकत्र रक्त और किन मरीजों को उपलब्ध कराया गया, इसकी जानकारी के साथ मरीजों का नाम, पता और मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। जिले में छह निजी ब्लड बैंक संचालित हैं, जो अब तक बिना ठोस निगरानी के स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित कर रहे थे। इससे रक्त के उपयोग और वितरण में पारदर्शिता की कमी थी। जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को जरूरत पर मुफ्त रक्त मिलता है, जबकि बाहरी मरीजों से निर्धारित शुल्क लिया जाता है।
कई ब्लड ग्रुप प्रभावित
अमरोहा। निजी ब्लड बैंकों की बढ़ती संख्या से जिला ब्लड बैंक में रक्त की कमी भी देखी जा रही है। कई महत्वपूर्ण ब्लड ग्रुप, खासकर नेगेटिव ग्रुप की उपलब्धता प्रभावित हुई है। इससे मरीजों को बाहर से रक्त मंगाना पड़ रहा है। सीएमओ ने चेतावनी दी कि नियमों की अनदेखी पर संबंधित ब्लड बैंक का पंजीकरण निरस्त कर संचालक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सभी निजी ब्लड बैंक पहले जिला अस्पताल की ब्लड बैंक और फिर सीएमओ कार्यालय से अनुमति लेंगे। संचालकों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। संवाद
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