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Amroha News: असुरक्षित सड़कों पर सुरक्षित सफर के दावे... कायदे चहुंओर दरकिनार

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अमरोहा। जिले की सड़कों पर चलना पूरी तरह असुरक्षित है। हादसे बढ़ रहे हैं और चहुंओर नियम दरकिनारे किए जा रहे हैं। हालांकि, असुरक्षित सड़कों पर लोगों को सुरक्षित सफर के सपने दिखाए जा रहे हैं। लोग सड़क पर वाहन लेकर चलते हैं तो हादसे का शिकार हो जाते हैं। ज्यादातर सड़कों पर सफर बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं। सड़कों से जेबरा क्रॉसिंग, संकेतक तक गायब हो चुके है। जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण सड़कें खून से लाल हो गई हैं। टूटी सड़कों पर आए दिन हादसे हो रहे हैं।
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हर साल करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी सड़कों में गड्ढे ही गड्ढे हैं। यह स्थिति शहर से लेकर गांव तक की सड़कों की है। कागजों में गड्ढा मुक्त जनपद की सड़कों की हकीकत बिल्कुल उलट है। यह आलम तब है जब लगातार शासन सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के निर्देश देता रहा है। सड़कों पर चलना और भी जोखिम भरा है।
सड़कों के गड्ढे दिखाई नहीं देते हैं। अनजान व्यक्ति रात के अंधेरे में इन गड्ढों वाली सड़कों से गुजर जाए, तो बिना चोट खाए रह ही नहीं सकता। पीडब्ल्यूडी, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, क्षेत्र पंचायत के अलावा नगर पालिका व नगर पंचायतों को सड़कों के गड्ढे भरना होता है। बावजूद इसके अधिकारी उदासीन रहते है। सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के मुख्यमंत्री के आदेश सिर्फ कागजों में सिमटकर रह गए हैं।
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जिले में ये स्थान बने हादसों की पहचान
गजरौला क्षेत्र में नौ स्थानों पर सबसे अधिक हादसे हुए हैं। इनमें सबसे अधिक जुबिलेंट फैक्टरी के सामने, कांकाठेर ढाल पर, गजरौला चौपला पर, अहरौला तेजवन गांव के सामने हादसे होते हैं। इसके अलावा डिडौली क्षेत्र में डिडौली पुल पर, चौधरपुर पुल पर, बुढ़नपुर के सामने, हरियाना गांव के सामने सड़क किनारे, श्योनाली जियारत के पास हादसे होते हैं। रजबपुर क्षेत्र में वेंकटेश्वर विवि के सामने और जीएमएस हॉस्पिटल के सामने सबसे ज्यादा हादसे होते रहे हैं।

सडक किनारे टूटे पड़े संकेतक बोर्ड
राहगीरों की सुविधा के लिए संकेतक बोर्ड लगाए जाते हैं। इनमें मुख्य रूप से आगे मोड़ है, गति सीमा, तिराहा है, पुल है, आदि कई तरह की जानकारियां होती हैं। जिससे वाहन चालकों की यात्रा सुगम हो सके लेकिन देहात क्षेत्र में वह संकेतक बोर्ड कहीं तो नीचे झुक गए, कहीं उखड़े पड़े है, कहीं खड़े हैं तो वो भी जर्जर हालत में हैं। कई जगह से संकेतक बोर्ड पूरी तरह से ही गायब हो गए हैं। डिडौली से कैलसा बॉर्डर और नन्हेड़ा अल्यारपुर होते हुए सोंडाला फरीदपुर तक वाली मुरादाबाद को जोड़ती है। यह काफी व्यस्त सड़क है। इस मार्ग पर किसी भी मोड़ पर संकेतक बोर्ड नहीं हैं। कहीं उखड़े हुए हैं तो कहीं टूटे हुए हैं।

यातायात माह चल रहा है। इस संबंध में पीडब्ल्यूडी विभाग को सड़कों पर डिवाइडर, संकेतक बोर्ड, साइन बोर्ड लगाने के लिए पत्र लिखा है। सड़के टूटी होने के कारण भी हादसे होते हैं, इस संबंध में भी पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों से बात की जाएगी। जिले में हादसों पर लगाम लगे, इस संबंध में पूरा प्रयास किया जाएगा।-अनुज मलिक, टीएसआई
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जिले में सड़कों की मरम्मत का काम चल रहा है। साइन बोर्ड, संकेतक बोर्ड का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है, जो अभी स्वीकृत नहीं हुआ है। बजट मिलते ही सभी तरह के बोर्ड लगाए जाएंगे।-गौरव रंजन, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी
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