गजरौला(अमरोहा)। माता-पिता खेत में गन्ना लगाने में व्यस्त रहे और उनका पांच वर्षीय इकलौता पुत्र खेलते-खेलते पास ही स्थित हौदिया में जा गिरा। काफी देर बाद उसका ध्यान आया तो उसकी तलाश की। हौदिया में झांककर देखा तो वह पानी में पड़ा हुआ था। यह देख उनकी चीख निकल गई। बाहर निकाला तो उसकी सांसें थम चुकी थीं। बालक को उपचार के लिए यहां सीएचसी लाया गया। यहां केंद्र अधीक्षक डा. योगेंद्र सिंह ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन शव को लेकर गांव लौट गए।
शनिवार की सुबह यह हादसा हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव अब्दीपुर में हुआ। यहां रहने वाला सुरेंद्र अपनी पत्नी अंजू के साथ खेत में गन्ने की फसल लगा रहा था। साथ में उनका इकलौता पुत्र पांच वर्षीय जयंत भी था। बताते हैं कि माता-पिता काम में व्यस्त रहे और जयंत खेलता हुए पास ही बनी लगभग पांच फीट गहरी पानी से भरी हौदिया के पास चला गया और उसमें जा गिरा। डूबने से उसके पेट में पानी भर गया, जिससे मासूम की मौत हो गई। वहीं काफी देर बाद दंपती का ध्यान जयंत की ओर गया तो उसे वहां न पाकर खेत में ही ढूंढने लगे। इसी दौरान सुरेंद्र की निगाह हौदिया पर पड़ी। उसने भीतर झांककर देखा तो जयंत पानी में डूबा पड़ा था। यह देख सुरेंद्र ने शोर मचा दिया। बालक को किसी तरह बाहर निकाला गया। पेट में पानी भर जाने के कारण उसकी सांसें थम चुकी थीं। अंजू ने रोना-बिलखना शुरू कर दिया। बाद में बालक को यहां सीएचसी लाया गया। यहां केंद्र अधीक्षक डा.योगेंद्र सिंह ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन शव लेकर लौट गए।
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बेटे के शव को गले से लगाकर बिलख पड़ी मां
गजरौला। यहां सीएचसी में अपने इकलौते पुत्र जयंत को जीवन की आस में लेकर आए सुरेंद्र और अंजू बाहर बैठकर उसके स्वस्थ होने की खबर मिलने की प्रतीक्षा कर रहे थे। भीतर उनके गांव से आए लोग थे। कुछ देर बाद सीएचसी स्टाफ स्ट्रेचर पर बालक का शव लेकर बाहर आया तो अंजू ने उसे स्ट्रेचर से उठाकर सीने से लगा लिया। वह दहाड़ें मार-मारकर रो रही थी। केंद्र अधीक्षक डा. योगेंद्र सिंह और एक निजी हास्पिटल के संचालक ऋषिपाल सिंह ने उन्हें समझाकर शांत किया। इसके बाद वे एंबुलेंस में शव लेकर रोते हुए चले गए।
(फोटो 16 जीजेएलपी07)