हसनपुर (अमरोहा)। दि किसान सहकारी चीनी मिल गजरौला-हसनपुर में लगभग पांच करोड़ रुपये के फर्जी गन्ना पर्ची घोटाले और 3,744 क्विंटल गन्ने की हेराफेरी के मामले में शासन ने बड़ा प्रशासनिक चाबुक चलाया है। उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल्स संघ लिमिटेड के संयुक्त प्रबंध निदेशक अरुणेश कुमार द्विवेदी ने चीनी मिल के प्रभारी मुख्य गन्ना अधिकारी डॉ. शिवेंद्र सिंह ढाका और उप प्रबंधक जगदीश प्रसाद को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संघ ने पूर्व जांच अधिकारी डॉ. हरि कृष्ण गुप्ता की जगह अब जिला गन्ना अधिकारी रामपुर को नया जांच अधिकारी नामित किया है।
साक्ष्य मिटाने की साजिश और सीसीटीवी फुटेज गायब
पेराई सत्र 2025-26 के दौरान जनवरी 2026 में अंजाम दिए गए इस घोटाले की परतें जब खुलनी शुरू हुईं, तो इसे दबाने की भी बड़ी कोशिश की गई। जांच टीम को 1 से 27 जनवरी 2026 के बीच की महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज पूरी तरह गायब मिली। इसके अलावा, मिल गेट के ट्रक कांटे पर सीसीटीवी कैमरे न लगवाना, कैमरों की एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रेक्ट न कराना, ईआरपी व्यवस्था के तहत मिल में आने वाली बुग्गियों, ट्रालियों और ट्रकों की मैपिंग न करना व तौल लिपिकों की नियम विरुद्ध ड्यूटी लगाना जैसी गंभीर प्रशासनिक लापरवाहियां और पद के दुरुपयोग के साक्ष्य मिले हैं।
भाकियू भानु की शिकायत और मीडिया रिपोर्ट पर संज्ञान
मामले के शुरुआती दौर में मुख्य गन्ना अधिकारी ने खुद को बचाते हुए निचले स्तर के कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज करा दी थी। इस पर भारतीय किसान यूनियन भानु के जिलाध्यक्ष चमन चौहान ने किसानों के साथ इसका विरोध दर्ज कराते हुए मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की थी। 30 अप्रैल 2026 को समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर और उप गन्ना आयुक्त व उप निबंधक सहकारी गन्ना समितियां मुरादाबाद से प्राप्त सूचनाओं पर संज्ञान लेते हुए 11 मई को आधिकारिक पत्र जारी किया गया। गहन जांच के बाद अधिकारियों की मिलीभगत और साक्ष्य मिटाने की साजिश की पुष्टि होने पर यह सख्त कदम उठाया गया है।