हजरत शरफुद्दीन शाह विलायत सोहरवर्दी रहमतुल्लाह अलैह के सालाना उर्स का मंगलवार को आगाज हो गया। पहले दिन तमाम अकीदतमंद दरगाह पर हाजिरी देने पहुंचे और दरगाह पर चादरपोशी कर मन्नतें मांगी।
हजरत शरफद्दीन शाह विलायत शाह का चार रोजा उर्स मंगलवार से शुरू हो गया। सुबह दरगाह पर कुरान ख्वानी हुई। बाबा की दरगाह पर माथा टेकने के लिए दूरदराज शहरों से जायरीन के आने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया था। यहां बाद नमाजे जौहर कव्वाली की महफिल सजाई गई। इसमें कव्वालों ने बाबा की शान में कलाम पेश किए।
दिनभर दरगाह शरीफ पर अकीदतमंदों ने चादरपोशी कर मन्नतें मांगीं। शाम ढलने पर पुरानी रिवायत के मुताबिक दरगाह पर चिराग रोशन किया गया। इस मौके पर मुल्क और कौम की तरक्की व सलामती की दुआ कराई गई।
इधर, दरगाह परिसर में लगे मेले में बच्चों ने झूलों का आनंद लिया तो महिलाओं ने जरूरत के सामान की खरीदारी की। खेल तमाशे और चाट पकौड़ियों के स्टाल भी मेले में लगे हैं। बताया जाता है कि यह ऐसी दरगाह है जहां सांप और बिच्छू भी अपना स्वभाव बदल देते हैं। इस क्षेत्र में न तो सर्प दंश करते हैं और न ही बिच्छू डंक मारते हैं। इसलिए इस करामाती दरगाह पर काफी संख्या में अकीदतमंद पहुंचते रहते हैं।
मंगलवार को शुरू हुए उर्स में दरगाह पर हाजिरी लगाने पहुंचे अकीदतमंदों की सुविधाओं को लेकर हजरत शर्फुद्दीन शाह विलायत कमेटी के जिम्मेदार लोग संजीदा दिखे।
दरगाह कमेटी के मुतावल्ली नज्जार दिलावर, दरगाह प्रबंध कमेटी के सदर इब्ने हैदर एडवोकेट, हकीम सैयद हुसैन, आदिल जफर खां, नईम अहमद, हसन इमाम, ताजदार मेहंदी, कामिल सिद्दीकी, मोहम्मद अफजाल, गुलजार अहमद, नसीम अहमद, नियाज हसन, हसीन हैदर, कमर सिब्तैन, फरजंद अली, जावेद हैदर आदि मौजूद रहे।