अमरोहा। सरकारी प्रोजेक्ट के तहत वूडन क्राफ्ट प्राइवेट लिमिटेड ने 10.64 करोड़ रुपये की धनराशि तो ले ली, लेकिन इसका गबन कर लिया। प्रोजेक्ट के तहत न मशीनें लगाईं और न ही उसका ऑडिट कराया। धोखाधड़ी के आरोप में उद्योग केंद्र के उपायुक्त विकास यादव की तहरीर पर वूडन क्राफ्ट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक व कंपनी के अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
डिडौली कोतवाली क्षेत्र के गांव फत्तेहपुर जिवाई मझरा में नेशनल हाईवे पर वूडन क्राफ्ट प्राईवेट लिमिटेड के नाम से फैक्टरी है। उद्योग केंद्र के उपायुक्त विकास यादव के अनुसार सात साल पहले कंपनी का चयन केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत हुआ था। कंपनी में लकड़ी के उत्पाद बनाए जाने थे। इसके बाद प्रदेश के निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड द्वारा कंपनी के लिए 14 करोड़ 7 लाख 76 हजार रुपये का प्रोजेक्ट स्वीकृत किया था। 31 मार्च 2015 में स्वीकृत हुए इस प्रोजेक्ट को साल 2018 तक पूरा किया जाना प्रस्तावित था। इसके लिए कंपनी को 10 करोड़ 64 लाख 45 हजार रुपये की धनराशि भी आवंटित कर दी गई थी।
आरोप है कि इस बीच कंपनी के निदेशक को प्रोजेक्ट का ऑडिट कराने के लिए कई बार रिमाइंडर भेजा गया लेकिन उन्होंने कार्यालय में अभिलेख जमा नहीं कराए। 26 दिसंबर 2019 को सहायक आयुक्त उद्योग अनिल कुमार तिवारी ने फैक्टरी पहुंचकर जांच की तो डीपीआर में दी गई 39 मशीनों के सापेक्ष मौके पर सिर्फ सात मशीनें ही लगी हुईं मिलीं। जबकि, निदेशक द्वारा विभागीय अधिकारियों को पत्र भेजकर डीपीआर के मुताबिक मशीनें लगाने की जानकारी दी गई थी।
डिडौली एसओ सुनील मलिक ने बताया कि तहरीर के आधार पर मैसर्स वूडन क्राफ्ट प्राईवेट लिमिटेड के निदेशक व अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ सरकारी धनराशि के गबन के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। जांच शुरू कर दी है।