अवैध रूप से संचालित पांच क्लीनिक और अस्पताल के संचालकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। इनमें एक अस्पताल पर तैनात डॉक्टर सहायक अध्यापक है। नोडल अधिकारी की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई की है।
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक टीमों ने 23 सितंबर को जिलेभर में झोलाछापों के खिलाफ छापामार अभियान चलाया था। डीएम के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई थी। इस दौरान कहीं झोलाछाप इलाज करते मिले थे, तो कहीं अस्पतालों में मानक अधूरे पाए गए थे। वहीं, नियम विरुद्ध चल रहे करीब 15 अवैध अस्पताल, क्लीनिक, अल्ट्रासाउंड व दवाखाना सील किए गए थे। इस दौरान टीम ने अमरोहा नायब तहसीलदार मोहल्ला दरबारे कलां में स्थित शिफा क्लीनिक का निरीक्षण किया था। क्लीनिक पर कोई डॉक्टर उपस्थित नहीं था, जबकि क्लीनिक पर डिडौली कोतवाली क्षेत्र के जगुआ गांव निवासी अरबाज मरीज को दवा देते मिले थे।
उनके पास क्लीनिक को संचालित करने के लिए कोई अभिलेख नहीं थे। कार्रवाई के दौरान क्लीनिक को बंद कर दिया था। जबकि, मोहल्ला सराय कोहना में स्थित डॉ. दानिश खान सहारा क्लीनिक बंद मिला था। उधर, 23 सितंबर को ही धनौरा एसडीएम चंद्रकांता ने सिटी हेल्थ क्लिनिक मोहल्ला कुरैशी का निरीक्षण करने पहुंचीं थी। लेकिन, इससे पहले अस्पताल संचालक क्लीनिक को बंद करके भाग निकले। उन्होंने कार्रवाई करते हुए क्लीनिक को सील कर दिया था। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने क्लीनिक संचालक डॉ. मनोज कुमार, डॉ. एसके गोला को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण तलब किया, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
नहीं दिखा सके पंजीयन संबंधित दस्तावेज
वहीं, एसडीएम न्यायिक अमरोहा सदर और नौगांवा सादात नायाब तहसीलदार ने अमरोहा नगर के मोहल्ला चौक स्थित गुलनाज क्लीनिक का निरीक्षण किया था। क्लीनिक में गुलनाज मौजूद थी। उनसे पंजीयन से संबंधित कागज मांगे गए तो वह नहीं दिखा सकी। तहसीलदार न्यायिक अमरोहा सदर ने मोहल्ला नल स्थित रिदा हॉस्पिटल पर भी छापा मारा था, जो अवैध रूप से चलाया जा रहा था। नोडल अधिकारी डॉ. शरद ने सभी को नोटिस देकर जवाब मांगे गए थे, लेकिन कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। सीओ अरुण कुमार ने बताया कि मामले में नोडल अधिकारी की तहरीर पर अस्पताल संचालक और डॉक्टर के खिलाफ राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।