अमरोहा। बसपा के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सदस्य सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि योगी सरकार में सबसे अधिक नुकसान ब्राह्मण समाज के लोगों का हुआ है। ब्राह्मण समाज एकजुट रहे और दूसरों को भी खुद से जोड़े।
वह सोमवार को जोया रोड स्थित एक होटल में बसपा की प्रबुद्ध वर्ग विचार गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। लगभग 50 मिनट के संबोधन में वह राज्य सरकार के प्रति हमलावर रहे। सपा को भी निशाने पर रखा। उन्होंने बसपा सरकार के दौरान ब्राह्मणों की भागीदारी का जिक्र किया। कहा कि उस समय 15 कैबिनेट मंत्री ब्राह्मण समाज के थे। उस वक्त पूरे प्रदेश में कानून का राज था, अब तक लोगों का घर में रहना मुश्किल हो गया है।
बसपा के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि भाजपा ने लोगों से झूठे वादे किए थे। हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन यहां तो नौकरी ही नहीं है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में प्रदेश की जनता परेशान हो गई है। योगी सरकार में सबसे अधिक नुकसान ब्राह्मण समाज के लोगों का हुआ है। उन्होंने भाजपा और सपा को एक ही सिक्के का दो पहलू बताया। कहा कि सरकार बदलने का सिर्फ इतना अंतर है कि केवल झंडा और चेहरा बदल गया है।
उन्होंने कहा कि अयोध्या से शुरू हुुआ बसपा का गोष्ठी कार्यक्रम अमरोहा तक 23 वें जिले में पहुंचा है। यह प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज एकजुट रहे और दूसरों को भी जोड़े। ऐसे में भाईचारा बनने से पिछड़ी, अति पिछड़ी जातियां और अल्पसंख्यक वर्ग के लोग जुड़ जाएंगे। यह एकजुटता प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा सीट पर भारी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि 2022 का विधानसभा चुनाव नजदीक आ गया है। ऐसे में धर्म के ठेकेदारों से होशियार रहें, क्योंकि अपने फायदे के लिए ये कुछ भी कर सकते हैं।
इस दौरान सांसद गिरीश चंद्र , पूर्व कैबिनेट मंत्री नकुल दुबे, पूर्व एमएलसी सुबोध पाराशर, रोहताश शर्मा, योगेंद्र शर्मा, नरेश शर्मा, बसपा जिलाध्यक्ष सोमपाल सिंह, नासिर हसन, दीपक शर्मा आदि मौजूद रहे।
कृषि कानूनों की वापसी का भी उठाया मुद्दा
बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि केंद्र सरकार पूंजीपतियों के इशारे पर काम कर रही है। सरकारी संपत्तियों को बेचने के बाद उसकी नजर किसानों की जमीन पर जम गई है।
पूंजीपतियों के कहने पर उसने कृषि कानून बनाए हैं, इससे किसानों की जमीन पूंजीपतियों के पास चली जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसा इसलिए किया है, क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान पूंजीपति वर्ग के लोग भाजपा को करोड़ों-अरबों रुपये की मदद करते हैं।