गजरौला (अमरोहा)। चेकिंग के दौरान नीली बत्ती लगी स्कार्पियो पुलिस के हत्थे चढ़ गई। गाड़ी चला रहे युवक को पुलिस ने पकड़ लिया। पुलिस का कहना है कि आरोपी फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को गुमराह कर रुपये ऐंठने का काम करता है। कस्बा चौकी इंचार्ज की तहरीर पर उसके खिलाफ संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। वहीं, उसे छुड़ाने के लिए प्रभावशाली लोग पुलिस पर लगातार दबाव बनाते रहे।
गुरुवार की सुबह कस्बा चौकी इंचार्ज एसआई रजनीश कुमार थाने के गेट के बाहर वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। बताते हैं कि इसी दौरान उन्हें सूचना मिली की मंडी धनौरा की दिशा से आ रही नीली बत्ती लगी सफेद रंग की स्कार्पियो में सवार युवक फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को गुमराह करता है और उनसे रुपये ऐंठने का काम करता है। पुलिस ने उक्त गाड़ी को आते देख रुकवा लिया। उस पर नीली बत्ती भी लगी थी। पुलिस के मुताबिक जानकारी करने पर गाड़ी में मिला अली वारिस पुत्र असगर अली निवासी गांव मोहरका पट्टी हाल निवासी मोहल्ला अतरपुरा कोई संतोषप्रद जवाब नहीं दे सका। कस्बा चौकी इंचार्ज एसआई रजनीश कुमार ने बताया कि पकड़े गए युवक के खिलाफ फर्जी अधिकारी बनकर लोगों पर रौब गांठने की शिकायत थी। गाड़ी को सीज एवं नीली बत्ती को सील कर उसके खिलाफ संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
दुष्कर्म पीड़ित छात्रा पर दबाव बनाने आया था आरोपी
गजरौला। चर्चा है कि नीली बत्ती लगी स्कार्पियो में आया अली वारिस सपा नेता एवं संजीवनी अस्पताल के संचालक जाफिर मलिक के खिलाफ दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराने वाली छात्रा पर समझौते के लिए दबाव बनाने आया था। गाड़ी में कुछ और लोग भी थे। वहीं थाने में मौजूद छात्रा ने समझौता करने से इनकार कर दिया। इसके बाद वहां आईं सीओ मोनिका यादव उसके 164 के बयान दर्ज कराने के लिए अमरोहा कोर्ट लेकर चली गईं। बता दें कि जाफिर मलिक के खिलाफ मंगलवार की रात बीए की एक छात्रा ने शादी का झांसा देकर एक वर्ष तक दुष्कर्म करते रहने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
एक पीपीएस अधिकारी की बताई जा रही है नीली बत्ती
गजरौला। सपा नेता एवं संजीवनी हास्पिटल के संचालक जाफिर अली के करीबी बताए जा रहे अली वारिस की स्कार्पियो पर लगी नीली बत्ती एक पीपीएस अधिकारी की बताई जा रही है। चर्चा है कि मंडी धनौरा में तैनाती के दौरान उक्त अधिकारी अक्सर आरोपी से सफेद रंग की स्कार्पियो मांग ले जाते थे। इस पर वह नीली बत्ती लगा लेते थे। उनके जाने के बाद नीली बत्ती वापस नहीं की गई। इंस्पेक्टर जयवीर सिंह ने बताया कि इसी नीली बत्ती की आड़ में भोले भाले लोगों को फर्जी अधिकारी बनकर डराया जाता था। गाड़ी पर नीली बत्ती लगी देख लोग आसानी से झांसे में आ जाया करते थे।