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Amroha News: ब्लड बैंक खुद बीमार...रक्त की दरकार

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अमरोहा। भीषण गर्मी में लोग बुखार-टाइफाइड की चपेट में आने लगे हैं। डेंगू भी पनपने की आशंका है। ऐसी स्थिति में भी जिले की ब्लड बैंक सूखने की कगार पर पहुंच गया है। साढ़े तीन सौ यूनिट वाली ब्लड बैंक में केवल 19 यूनिट रक्त बचा है। जबकि ए-निगेटिव एक यूनिट ब्लड को छोड़कर कोई भी निगेटिव ग्रुप का रक्त ब्लड बैंक में नहीं है। मरीज और तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति ये है कि गर्भवती महिलाओं को भी ब्लड मुहैया नहीं हो पा रहा है। लोगों को निजी ब्लड बैंक से मनमाने दामों में ब्लड लेना पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल में संचालित ब्लड बैंक की क्षमता 350 यूनिट रक्त संग्रहीत करने की है। लेकिन यहां औसतन 150 यूनिट रक्त रखा जाता है। क्योंकि रक्त 35 दिन से अधिक संग्रहीत नहीं किया जा सकता है। अमरोहा में खून की खपत कम है। इसलिए खून खराब भी न हो और जरूरत के हिसाब से सभी ग्रुप लोगों को मिल सकें, ब्लड बैंक कर्मी मुकम्मल व्यवस्था रखते हैं। फिलहाल रक्तदान करने वाले लोग भी नहीं पहुंच रहे हैं। जिस कारण ब्लड यूनिट कम हो गई है। सिजेरियन डिलीवरी केस में ब्लड की जरूरत पड़ती है। लेकिन अचानक में इमरजेंसी के हालात बने तो ब्लड के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है। लैब टेक्नीशियन मोहित चौधरी ने बताया कि फिलहॉल ब्लड बैंक में केवल 19 यूनिट खून मौजूद है। इसमें पॉजिटिव ग्रुप तो हैं, लेकिन निगेटिव ग्रुप की कमी है।
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गर्भवती महिलाओं को पड़ती है खून की जरूरत
जिले में सरकारी एक मात्र ब्लड बैंक है। लेकिन जिले की महिलाओं में अक्सर खून की कमी पाई जाती है। गर्भवती महिलाओं को ऑपरेशन और नार्मल डिलीवरी के दौरान डॉक्टर अक्सर खून चढ़ाने की जरूरत पड़ी है। ऐसे में खून की कमी होने से गर्भवती महिलाओं को लेकर भी खतरा बना हुआ है।
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ब्लड बैंक में रक्त की स्थिति
ए-पॉजिटिव02
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ओ-पॉजिटिव-10
ए-बी पॉजिटिव-02
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इन बीमारियों में पड़ती है ब्लड की जरूरत
एनीमिया, प्रसव के पूर्व, प्रसव के उपरांत डिलीवरी के बाद, मेजर सड़क दुर्घटना में रक्त रिसाव होने पर, ऑपरेशन, कैंसर, किडनी फेल्योर के मरीजों को अक्सर खून की जरूरत पड़ी है।

ब्लड बैंक कर्मियों की सूझबूझ से चल रहा काम
ब्लड बैंक में रक्त यूनिट लगभग खत्म हो चुका है। केवल 19 यूनिट बची है। बावजूद इसके ब्लड बैंक कर्मियों ने हिम्मत नहीं हारी है। उनका कहना है कि अगर इमरजेंसी में ब्लड की जरूरत पड़ती है तो, पहले प्राथमिकता मरीज के परिजनों को दी जाती है। जिससे उनके खून का मैच कर दिया जा सके। अन्यथा कुछ स्वैच्छिक डोनर लगातार संपर्क में बने रहते हैं। उन्हें बुलाकर आपात स्थिति में खून की पूर्ति की जा रही है।
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