गजरौला। किसान भी बिजली का पूरा बिल अदा करते हैं। इतना ही नहीं सबसे अधिक नोटिस और आरसी भी हम लोगों की काटी जाती है। इसके बावजूद किसानों का ही सबसे अधिक शोषण विभाग कर रहा है। शहर में 25 हजार से अधिक के बकाएदारों की लाइट काटी जा रही है तो गांवों में मात्र दस हजार बकाए वालों की। इतना ही नहीं गांवों में मात्र तीन घंटे ही सप्लाई दी जा रही है। अब ऐसा नहीं चलेगा यदि गांवों में दस घंटे सप्लाई नहीं मिली तो किसान आंदोलन के लिए विवश होंगे और इसकी जिम्मेदारी बिजली अधिकारियों की होगी। यह चेतावनी भाकियू (अराजनैतिक) के धरना-स्थल पर एकत्र किसानों ने दी।
बृहस्पतिवार को भाकियू (अराजनैतिक) से जुड़े किसान यहां फाजलपुर स्थित अधिशासी अभियंता के कार्यालय पर एकत्र हुए और धरना देकर बैठ गए। ब्लॉक प्रभारी चौधरी गिरिराज सिंह ने कहा कि बिजली विभाग किसानों को बेवकूफ समझता आ रहा है। अधिकारी सोचते हैं कि किसान आते हैं, धरना देकर ज्ञापन सौंपकर चले जाते हैं। करते कुछ नहीं हैं। यही वजह है कि किसानों की समस्याएं जस की तस हैं लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। बिजीली विभाग वालों को अपनी सोच बदलनी होगी। किसान कमजोर नहीं हैं। सिर्फ लिहाज करते हैं। उन्होंने कहा कि यह कौन सा कायदा है कि गांवों में दस घंटे सप्लाई के आदेश के बावजूद मात्र तीन घंटे ही लाइट दी जा रही है। उन्होंने सवाल दागा कि क्या किसान इंसान नहीं हैं? क्या वे बिल जमा नहीं करते? तो फिर क्यों हमारे साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है। इस दौरान जनपद के सभी किसानों की सम्मान निधि की राशि उनके खातों में डलवाने, जर्जर तार बदलवाने, चीनी मिलों द्वारा बकाया भुगतान कराए जाने, गांवों में साफ-सफाई कराए जाने आदि मुद्दों पर चर्चा की गई। जिला उपाध्यक्ष सतपाल सिंह, रामपाल सिंह, अशोक कुमार, सतेंद्र सिंह, बलराम सिंह, जयपाल सिंह, होमपाल सिंह, छोटे लाल, ब्रजपाल सिंह, अमीपाल सिंह, अरशद अली, अनिल कुमार, सुशील कुमार, रघुवर सिंह, कुंदन सिंह, आलोक कुमार, पंकज कुमार, वेदपाल सिंह आदि रहे।
पशु प्रसार अधिकारियों को सुनाई खरीखोटी
गजरौला। भाकियू (अराजनैतिक) ने धरना स्थल पर पशु चिकित्साधिकारी को भी बुलाया था लेकिन वह नहीं आए और अपने स्थान पर दो पशु प्रसार अधिकारियों को भेज दिया। धरना स्थल पर एकत्र किसानों ने इन्हें जमकर खरीखोटी सुनाई। कहा कि चिकित्सालय में जाने पर दवा तो दूर कीड़े मारने के लिए फिनायल तक नहीं मिलता। पशु चिकित्सक गांवों में नहीं जाते बल्कि झोलाछापों को वहां भेज देते हैं। वे किसानों से मनमानी रकम ऐंठते हैं। उन्होंने कहा कि अगली बार यदि कोई झोलाछाप दिखाई दिया तो उसे सबक सिखाया जाएगा। किसानों के तेवर देख दोनों मुंह नीचे किए बैठे रहे।