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Amroha News: देव प्रतिमाओं के गंगा में विसर्जन पर लगाई रोक

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गजरौला। भगवान गणेश और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां गंगा में विसर्जित नहीं की जाएंगी। तिगरी में उनको तट बांध के निकट पुराने तालाब में और ब्रजघाट में गंगा पुल के नीचे गड्ढे खोद कर उनमें जल भर कर मूर्तियों को विसर्जित किया जाएगा।
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गणेश चतुर्थी के अवसर पर मंदिरों में भगवान गणेश और अन्य देवी-देवताओं की मूर्ति स्थापित कर विधिविधान से प्रतिदिन आराधना की जाती है। गणेश महोत्सव संपन्न हाेने पर मूर्तियों को गंगा में विसर्जित किया जाता है। मगर एनजीटी ने गंगा और अन्य नदियों में प्रतिमाएं विसर्जन पर प्रतिबंध लगा दिया है। उसका मानना है कि मूर्तियां पत्थर, प्लास्टिक और लोहे की होती हैं। जिसे जल में प्रवाहित करने से नदियों में प्रदूषण बढ़ता है। उनमें तरह-तरह का रसायन युक्त रंग भरा जाता है। जो जल को जहरीला करता है।
नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए एनजीटी ने भगवान गणेश व अन्य मूर्तियों को गंगा व अन्य नदियों में विसर्जित न करने के निर्देश दिए हैं। जिसका पालन कराने के लिए पुलिस ने गणेश महोत्सव आयोजकों और गजानन सेवा समिति के पदाधिकारियों से मूर्तियों को गंगा जल में विसर्जित न करने को कहा है। श्रद्धालुओं की आस्था और श्रद्धा को देखते हुए तिगरी में तट बांध किनारे पुराने तालाब में मूर्तियां विसर्जित करने का स्थान बताया है। उस तालाब में गंगा का जल भर जाता है। तालाब में विसर्जन से गंगा भी प्रदूषित होने से बच जाएगी और आस्था भी बनी रहेगी। इसी तरह अमरोहा जिले की सीमा में ब्रजघाट में मूर्तियां विसर्जित करने के लिए पुल के नीचे गड्ढे खोद कर उनमें गंगा जल भरा जाएगा, जबकि जो श्रद्धालु हापुड़ जिले की सीमा में ब्रजघाट में मूर्तियों को विसर्जित करने के लिए ले जाएंगे, उनसे नहर में विसर्जन कराया जाएगा। सीओ मंडी धनौरा अरुण कुमार सिंह का कहना है कि एनजीटी के आदेशों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
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