अमरोहा। मनरेगा से बांगड़पुर माफी गांव में इंटरलॉकिंग नहीं होने और भुगतान के मामले की जांच शुरू हो गई है। उपायुक्त मनरेगा ने बीडीओ और एपीओ से जवाब तलब किया है। दोनों से छह बिंदुओं पर जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है, जिसमें सीडीओ को ब्लॉक कार्यालय में अभिलेख क्यों नहीं उपलब्ध कराया गया, इसके अलावा इंटरलॉकिंग प्रकरण में भुगतान की गई रकम को गबन मानते हुए वसूली की चेतावनी दी गई है।
गजरौला के बागड़पुर माफी गांव में मनरेगा से 70 मीटर इंटरलॉकिंग के लिए 1.43 लाख रुपये का भुगतान का मामला तूल पकड़ने के बाद विभागीय स्तर से जांच शुरु हो गई है। उपायुक्त मनरेगा अमरेंद्र प्रताप सिंह ने बीडीओ और एपीओ को नोटिस जारी किया है। मालूम हो कि सफाई कर्मचारी आयोग के सदस्य मनोज वाल्मीकि और गांववालों की शिकायत के बाद सीडीओ ने ब्लॉक कार्यालय में पहुंच कर अभिलेख तलब किया गया था लेकिन बीडीओ सत्येंद्र कुमार ने अभिलेख दिखाने के बारे में आनाकानी शुरू कर दी। इसके बाद वह गांव में स्थलीय निरीक्षण किए।
अब उपायुक्त मनरेगा अमरेंद्र प्रताप सिंह ने छह बिंदुओं पर जवाब तलब किया है। उन्होंने पूछा है कि ब्लॉक कार्यालय में अभिलेख क्यों नहीं दिखाया गया जबकि मनरेगा के तहत कामों की पत्रावलियों की द्वितीय प्रति कार्यालय में रखा जाता है। इसके अलावा खड़ंजा अच्छी स्थिति में है उसको उखाड़ कर इंटरलॉकिंग क्यों कराई जा रही है हालांकि इसकी आवश्यकता नहीं है। एक व्यक्ति के घर तक काम कराने का औचित्य उसे लाभ पहुंचाना प्रतीत हो रहा है। इसके अलावा काम कराए बगैर भुगतान क्यों किया गया है। इसके अलावा मैटेरियल के लिए भुगतान से पहले उस कार्य का स्थलीय सत्यापन क्यों नहीं किया गया है।
बांगड़पुर माफी में मनरेगा से भुगतान और अभिलेख नहीं दिखाने के प्रकरण में नोटिस जारी किया गया है। बीडीओ सत्येंद्र कुमार और एपीओ सौरभ कुमार से छह बिंदुओं पर जवाब उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। अमरेंद्र प्रताप सिंह, परियोजना निदेशक डीआरडीए और उपायुक्त मनरेगा