आदमपुर में यगद नदी पर अवैध रूप से कब्जे के मामले को अमर उजाला की ओर से उठाने के बाद ग्रामीण एकजुट हुए और विरोध किया तो उनकी मुहिम भी रंग लाने लगी है। बुधवार को अवैध रूप से बने मकानों को गिरवाने के बाद प्रशासन ने तीन जेसीबी से नदी की खुदाई शुरू करा दी है, मगर ग्रामीणों का आरोप है कि, प्रशासन चार साइफन (पानी की निकासी के लिए पुल में लगने वाली पुलिया) के सामने दो लोगों के कब्जे पर हाथ डालने से कतरा रहा है।
इससे खफा 11 ग्रामीणों का आमरण अनशन दूसरे दिन भी जारी रहा। इसमें बृहस्पतिवार को एक बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ गई, किसी तरह उसे होश में लाया गया। इससे पहले रात में आमरण अनशन पर बैठे ग्रामीणों की पुलिस के अनशन तोड़ने का दबाव बनाने पर पुलिस से नोकझोंक भी हुई। ग्रामीणों का कहना है कि, पूरी नदी को अतिक्रमणमुक्त बनाए जाने तक आमरण अनशन जारी रहेगा।
हसनपुर तहसील क्षेत्र गांव आदमपुर से होकर आगे की ओर जा रही यगद नदी पर कुछ दबंगों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया था। अमर उजाला में कब्जे की खबर प्रकाशित होने के बाद क्षेत्र के एक दर्जन गांव से अधिक ग्रामीण आंदोलन पर उतर आए। लेकिन अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की। बुधवार को क्षेत्र के ग्यारह लोग आमरण अनशन पर बैठ गए, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया।
सूचना पर पहुंचे एसडीएम ने यगद नदी को कब्जा मुक्त कराने के निर्देश दिए। तीन जेसीबी से अवैध रूप से बनाए गए तीन मकान ध्वस्त कराए, मगर किसानों का कहना है कि, प्रशासन चार साइफन के सामने दो लोगों के कब्जे हटवाने की कोशिश नहीं कर रहा है। इससे ग्रामीणों ने अनशन नहीं तोड़ा। दूसरे दिन भी ग्रामीणों का आमरण अनशन जारी है।
अनशनकर्ताओं का कहना है कि यगद नदी के साठ फीट लंबे पुल में 23 साइफन लगे हैं, लेकिन प्रशासन मात्र 19 साइफन के सामने का कब्जा हटा रहा है। जबकि चार साइफन के सामने दो दबंगों का कब्जा बरकरार है। चेतावनी दी कि यगद नदी और रावण दहन मेला स्थल के पूर्ण रूप से कब्जा मुक्त होने तक आमरण अनशन जारी रहेगा। एसडीएम अशोक मौर्य का कहना है कि नदी को पूरी तरह कब्जा मुक्ता कराया जाएगा।