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Amroha News: दम तोड़ रहा अमरोहा का हथकरघा उद्योग, 800 इकाइयां हुईं बंद

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अमरोहा। बेडशीट, कालीन, टेबल कवर और अन्य हस्तनिर्मित कपड़ा उत्पादों के लिए पहचान रखने वाला अमरोहा का हथकरघा उद्योग आज अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। करीब दो दशक पहले जिले में 1000 से अधिक हथकरघा इकाइयां संचालित थीं, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर करीब 200 रह गई है। सुविधाओं के अभाव, बढ़ती उत्पादन लागत और सरकारी योजनाओं के बंद होने से 800 इकाइयां बंद हो चुकी हैं।
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एक समय जिले की करीब 17 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग से जुड़ी थी। बुनकर बेडशीट, टेबल कवर, फुट मैट, बाथ मैट, पर्दे, सोफा व कुशन फैब्रिक, तौलिया, एप्रैन और गारमेंट्स जैसे उत्पाद तैयार कर हजारों लोगों को रोजगार देते थे।
नेशनल बुनकर हथकरघा औद्योगिक उत्पादन सहकारी समिति के अध्यक्ष परवेज आरिफ टीटू के अनुसार, पूर्व विधायक खुर्शीद अंसारी के कार्यकाल में उद्योग को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश हथकरघा निगम का पर्चेज डिपो खोला गया था, जहां प्रत्येक बुनकर से हर माह 12 बेडशीट खरीदी जाती थीं। स्थानीय स्तर पर सूत मिल स्थापित होने से सात प्रतिशत सब्सिडी पर धागा मिलता था और करीब पांच हजार लोगों को रोजगार मिला था।
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बाद में पर्चेज डिपो और सूत मिल दोनों बंद हो गए। अब बुनकरों को पानीपत से कच्चा माल मंगाना पड़ता है, जिससे परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ गई है तथा मुनाफा घटने से बड़ी संख्या में कारीगर इस व्यवसाय को छोड़ चुके हैं।
कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि सरकार कच्चे माल पर सहायता, विपणन की बेहतर व्यवस्था और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराए तो हथकरघा उद्योग को फिर से गति मिल सकती है। इससे पारंपरिक कारीगरी को नया जीवन मिलने के साथ हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
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कभी रोजगार का बड़ा केंद्र था हथकरघा

दो दशक पहले 500 से अधिक इकाइयां थीं।
करीब 17 प्रतिशत आबादी उद्योग से जुड़ी थी।
हजारों परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन था।
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ये उत्पाद आज भी बन रहे हैं
बेडशीट
टेबल कवर
फुट व बाथ मैट
पर्दे व सोफा फैब्रिक
कुशन फैब्रिक
तौलिया, एप्रैन और गारमेंट्स
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उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां
-पर्चेज डिपो और सूत मिल बंद

-स्थानीय स्तर पर धागा उपलब्ध नहीं
-पानीपत से कच्चा माल मंगाने से बढ़ी लागत
-सरकारी सहायता और विपणन की कमी
-लगातार घट रही बुनकरों और इकाइयों की संख्या
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हथकरघा लघु उद्योग से जुड़े कारीगरों को सरकार की ओर से अधिक सुविधाएं और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। कच्चे माल और विपणन की बेहतर व्यवस्था हो जाए तो यह उद्योग फिर से अपनी पुरानी पहचान हासिल कर सकता है और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिल सकेगा।
-परवेज आरिफ टीटू, अध्यक्ष, नेशनल बुनकर हथकरघा औद्योगिक उत्पादन सहकारी समिति
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सहकारी कताई मिल को फिर से चालू किया जाए। धाग पानीपत से मंगाना पड़ता है। जिससे परेशानी होती है। बुनकरों के लिए और रियात मिलनी चाहिए।
-फैजान, शाहद हैंडलूम फैक्टरी, नौगावां सादात
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पहले पावरलूम सरकार की ओर से व्यवस्था की जाती थी लेकिन अब दो साल से नहीं मिल रही है। शासन स्तर पर कई बार पत्राचार किया गया है। जो भी योजनाएं बुनकरों के लिए हैं, उन सबका लाभ दिया जा रहा है।
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-अश्वनी कुमार, सहायक आयुक्त हथकरघा, मुरादाबाद मंडल
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