स्वास्थ्य विभाग चाहे जो दावे करे लेकिन जानलेवा बुखार बेकाबू होता जा रहा है। एक तरफ लोग बुखार से दम तोड़ रहे हैं तो दूसरी ओर स्वास्थ्य सेवाएं नाकाफी साबित हो रही है। तीन दिनों से जुगाड़ के सहारे मरीजों को इलाज किया जा रहा है। बुधवार को जिला अस्पताल में स्थिति बेहद चौकाने वाली थीं। यहां एक-एक बेंच पर चार-चार मरीजों को बैठाकर ड्रिप लगाई गई।
देखा जा रहा है कि जिला अस्पताल बुखार के मरीजों से फुल है। लेकिन विभाग के पास उन्हें समुचित इलाज देने की व्यवस्था नहीं है। तीनों दिनों में मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है।
जिसके चलते या तो मरीजों को दवाई देकर लौटा दिया जा रहा है या फिर ड्रिप लगाकर कुछ घंटे बाद डिस्चार्ज कर दिया जाता है। बुधवार को जिला अस्पताल में 2049 मरीजों की ओपीडी हुई। जिसमें 138 बुखार के मरीज निकले। अधिकांश को दवाई देकर घर भेज दिया गया।
बुखार के साथ डेंगू भी खूब पैर पसार रहा है। जिला अस्पताल में 30 डेंगू आशंकित मरीज पहुंचे। उनका रेपिड टेस्ट कराया गया। जिसमें दस मरीज डेंगू पॉजिटिव निकले। इसके साथ ही जिले में डेंगू मरीजों की संख्या 105 पहुंच गई है। उधर, जिला अस्पताल में बुधवार को डेंगू वार्ड में सात मरीजों का इलाज चल रहा था।
क्षेत्र में जानलेवा बुखार का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार दूसरे दिन एक और जान को बुखार ने लील लिया है। क्षेत्र के गांव मटैना में लेखराज की पंद्रह वर्षीय बेटी कविता को पिछले तीन दिन से बुखार आ रहा था। परिजनों ने पास के ही निजी चिकित्सक से उपचार करवाया।
हालत में कोई सुधार नहीं हो सका। लगातार उसकी हालत खराब होती चली गई। प्लेटलेट्स कम हो गईं। मंगलवार की की देररात छात्रा की मौत हो गई। वह कक्षा दस में पढ़ती थी। छात्रा की मौत की सूचना से परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई है। मृतका पांच भाई बहनों में तीसरे नंबर की थी।