अमरोहा। शिया समुदाय के चौथे इमाम हजरत इमाम जैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम के यौम-ए-शहादत पर रविवार को पूरा शहर गम के माहौल में डूब गया। शहर के विभिन्न इमामबारगाहों में मजलिस, नौहाख्वानी और मातम का सिलसिला देर रात तक जारी रहा, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर इमाम को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
मोहल्ला सद्दो स्थित इमामबारगाह में आयोजित वार्षिक मजलिस को मशहूर आलिम-ए-दीन और शायर मौलाना किरतास करबलाई ने खिताब किया। उन्होंने इमाम जैनुल आबेदीन की इबादत, सब्र और कर्बला के बाद उनके द्वारा सहे गए कठिन हालात पर विस्तार से प्रकाश डाला। दरबार शाह अबुल हसन में आयोजित मजलिस को मौलाना शाहवेज अली जैदी ने संबोधित करते हुए कहा कि कर्बला की त्रासदी के बाद इमाम जैनुल आबेदीन ने बीमारी की हालत में भी सब्र, इबादत और अपने चरित्र के माध्यम से कर्बला के पैगाम को पूरी दुनिया तक पहुंचाया, जो इंसानियत के लिए हमेशा एक आदर्श रहेगा। मजलिस के बाद देर रात तक अंजुमनों की ओर से नौहाख्वानी और सीनाजनी (मातम) का सिलसिला चलता रहा। इमामबारगाह बाबुल मुराद में आयोजित मजलिस को मौलाना आजम जैदी ने खिताब किया।
मोहल्ला दानिशमंदान स्थित दरबार-ए-हुसैनी में मजलिस के समापन पर बेहद गमगीन माहौल में इमाम के ताबूत की शबीह बरामद की गई। वहीं इमामबारगाह मैमुना खातून में मौलाना दानिश नौगांवी ने मजलिस को खिताब किया, जिसके बाद शबीह-ए-ताबूत बरामद हुआ। ताबूत की शबीह सामने आते ही पूरा माहौल या हुसैन और या जैनुल आबेदीन की सदाओं से गूंज उठा।