फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमरोहा : सांथलपुर गोशाला में जांच के लिए पहुंचे अधिकारी

Tue, 28 Oct 2025 02:35 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
विज्ञापन
विज्ञापन
ढबारसी (अमरोहा)।
विज्ञापन

गंगेश्वरी ब्लॉक के वृहद गो संरक्षण केंद्र सांथलपुर में गोवंशीय पशुओं की बदहाली और पशुओं की मौत का मामला सामने आने के बाद सोमवार को अपर निदेशक मुरादाबाद मंडल जगदीश प्रसाद, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाॅ. आभा दत्त व जिला विकास अधिकारी सरिता द्विवेदी ने गोशाला में पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया।
हालांकि इस दौरान किसी को भी अंदर नहीं जाने दिया। डाॅ. आभा दत्त ने बताया कि गोशाला में 22 अक्तूबर से तीन पशु बीमार चल रहे थे। इनमें से दो की 24 अक्टूबर को मौत हो गई। पशुओं के शव दबाने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं होने से परेशानी आ रही है। गोशाला के केयर टेकर व ग्राम प्रधान को निर्देशित किया गया है कि गोशाला के संचालन में लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सोमवार को गोशाला में दो पशु और बीमार मिले हैं, जिनका उपचार कराया जा रहा है।
विज्ञापन

उधर, रविवार को वीडियो वायरल होने के बाद जिला गोरक्षा प्रमुख मांकेराम चौहान ने बताया था कि शुक्रवार को उनके साथी दीपांशु कश्यप व मोहित कुमार के साथ सांथलपुर गोशाला में पशुओं की बदहाली देखी थी। इस संबंध में एक शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी दर्ज कराई थी। उनका दावा है कि गोशाला परिसर में कई मृत पशु खुले में पड़े थे।
उनके द्वारा बनाई गई वीडियो में दिखाया गया था कि परिसर में जगह-जगह पशुओं के अवशेष बिखरे हुए थे। हालांकि एसडीएम पुष्करनाथ चौधरी ने इस वीडियो को चार साल पुराना होने का दावा किया था जब गोशाला में 61 गोवंशीय पशुओं की मौत हुई थी।
गोवंश आश्रय स्थलों की व्यवस्था सुदृढ़ करने के दिए निर्देश

हसनपुर। एसडीएम पुष्करनाथ चौधरी ने सोमवार को तहसील सभागार में गोवंश आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए बैठक में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए गए। कहा कि गोवंशों के उचित भरण-पोषण, स्वास्थ्य सुरक्षा और आश्रय स्थलों के बेहतर संचालन किया जाए। इसमें लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
विज्ञापन

एसडीएम ने कहा कि सबसे पहले सभी गोवंशों को ठंड और वर्षा से बचाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सही की जाएं। साथ ही पशुओं के नीचे कीचड़ और नमी न रहने पाए, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए। गोवंशों के गोबर का उपयोग जैविक खाद बनाने के लिए कृषि विभाग के समन्वय से सुनिश्चित करने को कहा गया। बीमार गोवंशों के लिए प्रतिदिन स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, मृत पशुओं के शव का निस्तारण सम्मानपूर्वक, 6-7 फीट गहरा गड्ढा खोदकर, लाल कपड़ा और नमक डालकर किया जाएगा, जिसका एक फोटोग्राफ भी लिया जाना सुनिश्चित जाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें