अमरोहा। यातायात माह में भी जिले की सड़कों पर दौड़ रहे डग्गामार और ओवरलोड वाहन लोगों की जान और खुद के लिए खतरा बन रहे हैं। कम किराए का लालच देकर सवारियों को वाहनों में ठूंस-ठूंस कर भरा जाता है।
इन वाहन चालकों में पुलिस व प्रशासन का भी कोई खौफ नहीं है। यहां की सड़कों पर चल रहे इस प्रकार के वाहनों पर कोई नियंत्रण नहीं होने के चलते यह आए दिन हादसों का भी सबब बन रहे हैं। अपनी जान जोखिम में डाल इन वाहनों में यात्रा कर रहे लोगों की भी अपनी मजबूरी है। इन वाहनों पर यात्री लटककर सफर करते हैं। यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की अनदेखी कार डग्गामार वाहन संचालकों का हौसला बढ़ा रहा है।
आठ सीटर वाहन में चालक 12 से 15 सवारियां भरकर फर्राटा भरते हैं। वहीं, 35 सीटर निजी बसों में 50 से 60 सवारियां बिठाई जा रहीं हैं। बावजूद इसके कोई रोक नहीं। सड़क हादसों को रोकने के लिए भले ही शासन गंभीर है लेकिन जिलास्तर पर गंभीरता नहीं दिखाई देती। दिल्ली हाईवे पर कई पुलिस चेक पोस्ट हैं।
परिवहन विभाग व पुलिस सुबह-शाम वाहनों की जांच करती दिखती है लेकिन कार्रवाई सिर्फ दो पहिया वाहन या फिर ई-रिक्शा तक ही सीमित रहती है। आलम यह है कि हसनपुर-गजरौला, जोया से संभल और अलट चौक से मंडी धनौरा और नौगांवा सादात रोड पर बड़ी संख्या में डग्गामार मानक से अधिक सवारियां लेकर दौड़ते हैं।
बड़ी संख्या में मैजिक, निजी बसें, ईंट भरी ट्रॉलियां, ट्रक पर कोई खास कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। हाईवे पर भी डग्गामार की भरमार है। सुबह छह बजे से डग्गामार दौड़ने लगते हैं जो देर शाम तक बेरोकटोक चलते हैं। शहर की सड़कों पर ई-रिक्शा भी नियमों की अनदेखी कर दौड़ रहे हैं। मानक के ज्यादा सवारियां या स्कूलों बच्चों को बैठाया जाता है।
माल वाहक वाहन में भी सवारियां
जिले में डग्गामार वाहन की भरमार तो है ही साथ ही माल वाहनों से भी सवारियों को लाने ले जाने का काम किया जाता है। जोया में चलने वाले छोटे व बड़े वाहनों के संचालक यातायात माह में नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। हालत यह है कि वाहनों में बैठने की जगह नहीं होने पर छतों पर सवारियां बैठाई जा रही हैं। अहम बात यह है कि यातायात पुलिस लोगों को नियमों का पालन कर वाहन संचालन में दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रचार-प्रसार में लगा हुआ है। वहीं, इन मार्गों पर हो रही ओवरलोडिंग की स्थिति पर ध्यान देने की जरूरत महसूस नहीं कर रहा। ऐसे में बेखौफ वाहन संचालक लोगों की जिंदगी से खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं।
ई-रिक्शा में लटक कर सफर करते हैं नौनिहाल
सुरक्षा मानक दरकिनार कर फर्राटा भरने वाले ई-रिक्शाओं में बेखौफ स्कूली बच्चे ढोए जा रहे हैं। इनमें क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जा रहा है। ई-रिक्शा के पायदान पर लटक कर नौनिहाल सफर करने को मजबूर रहते हैं। इससे स्कूल जाते व घर लौटते समय उनकी सुरक्षा भी दांव पर रहती है। इसकी रोकथाम को लेकर स्कूल प्रबंधन के साथ ही बच्चों के अभिभावक भी पूरी तरह उदासीन बने हैं। परिवहन विभाग भी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है।
बस अड्डे से सवारियां ले जाते हैं डग्गामार
रोडवेज बस अड्डे के बाहर सवारियां लादकर राजस्व को चूना लगाने वाले डग्गामार वाहनों पर विभाग भी अंकुश नहीं लगा पा रहा जिससे दिनों दिन इनकी संख्या में इजाफा हो रहा है। आलम यह है कि अमरोहा सहित अन्य स्थानों पर यात्रा करने वाली सवारियों को वाहन चालक कम किराए की बात कहते हुए बस अड्डे के अंदर से बरगलाकर ले आते हैं जिससे सरकारी बसें खाली ही दिखाई देती हैं।
विभाग ने इनको बस अड्डे के बाहर से खदेड़ने के लिए पूर्व में कवायद की थी लेकिन अफसरों के रवैये से डग्गामार वाहन लगातार संचालित हो रहे हैं। पुलिसकर्मी भी इन वाहनों को हटाने की जहमत नहीं उठाते। मानक से अधिक सवारियां लादकर चलने वाले ये वाहन खुलेआम फर्राटा भरते नजर आते हैं। राजस्व को चूना लगाने वाले इन वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए कोई भी विभागीय अधिकारी प्रभावी कदम नहीं उठाते हैं।
- डग्गामार वाहनाें के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाती है। पिछले दिनों भी 107 वाहनों पर कार्रवाई की थी। यातायात माह में फिर अभियान चलाकर कार्रवाई करेंगे। - महेश शर्मा, एआरटीओ प्रवर्तन