यह था पूरा मामला
नौगांवा सादात निवासी कारोबारी मोहम्मद आरिफ को मोहल्ला नई बस्ती में बीड़ी कारखाना है। आरोप है कि कारोबारी आरिफ के मोबाइल पर पिछले पांच दिन से कुछ अनजान नंबरों से कॉल आ रही थी। फोन करने वाले लोग खुद को दिल्ली सीबीआई दफ्तर से बता रहे थे। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री कार्यालय से उनके पास कारोबारी के कारखाना और घर पर छापा मारने का आदेश मिला है। इसके अलावा भी उनके खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं।
सीबीआई दफ्तर से फोन आने के बाद कारोबारी आरिफ परेशान थे। लगातार फोन आने के कारण उन्होंने अपना मोबाइल बंद कर लिया। मंगलवार की शाम उन्होंने अपना मोबाइल खोला तो फिर से कॉल आनी शुरू हो गईं। फोन करने वाले लोगों ने बताया कि बुधवार सुबह सीबीआई के इंस्पेक्टर भूपेंद्र सिंह रावत नौगांवा सादात पहुंच रहे हैं और उनके पास शिकायतों की फाइल है।
यदि कार्रवाई नहीं चाहते तो 25 लाख रुपये देकर मामला रफादफा कर लेना। बुधवार दोपहर एक व्यक्ति उनके कारखाने पर पहुंचा और उसने खुद को सीबीआई इंस्पेक्टर भूपेंद्र रावत बताया। उसने दिल्ली सीबीआई के सीओ के नाम वाला एक फर्जी पत्र भी दिखाया। जिस पर बीड़ी कारखाने पर छापा मारने का आदेश दर्ज था।
भूपेंद्र ने कारोबारी आरिफ से 25 लाख रुपये की मांग की। कारोबारी ने रकम का इंतजाम नहीं होने की बात कही तो फर्जी सीबीआई इंस्पेक्टर ने जितने पैसे उपलब्ध हैं, देने के लिए कहा। साथ ही बाकी रुपये बाद में देने की बात कही थी। इस बात पर कारोबारी शक हुआ तो उन्होंने दूसरे कमरे में जाकर डायल 112 पुलिस को बुला लिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने फर्जी इंस्पेक्टर को गिरफ्तार कर लिया था।
इन धाराओं में दर्ज हुई रिपोर्ट
सीओ ने बताया कि चारों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 308(2), 315(4), 319(4), 338, 336 (3) और 340(2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। सभी धाराएं भय दिखाकर जबरन वसूली करना, किसी संपत्ति का बेईमानी से दुरुपयोग करना, जालसाजी करना, जान-बूझकर जाली दस्तावेज का इस्तेमाल करना अपराध से संबंधित हैं।