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Amroha: हाईकोर्ट बेंच की मांग... अधिवक्ताओं ने किया जोया मार्ग जाम, सीएम को भेजा ज्ञापन

Wed, 17 Dec 2025 06:55 PM IST
विमल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा

सार

पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट की मांग को लेकर जिले भर के वकीलों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। इसके बाद उन्होंने सांकेतिक ताैर पर जाम भी लगाया। कहा कि इलाहाबाद दूर होने के कारण वादकारियों और वकीलों को परेशानी होती है। 
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अमरोहा में वकीलों ने किया प्रदर्शन - फोटो : संवाद
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विस्तार
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बार एसोसिएशन, जनपद अमरोहा के बैनर तले अधिवक्ताओं ने जोया मार्ग जाम कर हाईकोर्ट बेंच स्थापना की मांग की दोहराई। मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एडीएम एफआर गरिमा सिंह, एएसपी अखिलेश भदौरिया को सौंपा। जाम के चलते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लाइन लग गईं।

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इससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बुधवार को बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सलीम खान व सचिव सतीश कुमार त्यागी के नेतृत्व में अधिवक्ता एकत्र होकर जोया रोड पहुंचे और अपनी मांग को लेकर जोया मार्ग जाम कर दिया। विरोध स्वरूप जमकर नारेबाजी की।

कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करोड़ों नागरिकों को उच्च न्यायालय तक पहुंचने में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिम उत्तर प्रदेश एक अत्यधिक जनसंख्या वाला एवं औद्योगिक कृषि क्षेत्र है। यहां से लाखों वाद हर साल इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दाखिल होते हैं।
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पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, अमरोहा, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, संभल आदि जनपदों से वादकारियों एवं अधिवक्ताओं को इलाहाबाद तक लगभग 700-800 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है।

इससे समय, धन एवं संसाधनों की भारी क्षति होती है। परिणामस्वरूप गरीब, किसान, मजदूर एवं कमजोर वर्ग न्याय से वंचित रह जाते हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश अपराध, औद्योगिक, सेवा एवं भूमि विवादों की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र है।

वर्तमान परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में वादकारियों को मानव अधिकारों एवं संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के मामलों में याचिकाएं दाखिल करनी होती हैं। फिर भी यहां उच्च न्यायालय की कोई बेंच नहीं है, जो न्यायिक असंतुलन को दर्शाता है।

उनकी मांग है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एक स्थाई बेंच पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसी भी जनपद में स्थापित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा शीघ्र ठोस कदम उठाया जाए। इस विषय में केंद्र सरकार एवं भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय को आवश्यक प्रस्ताव व संस्तुति तत्काल भेजी जाए, बेंच स्थापना के लिए भूमि, भवन एवं आवश्यक आधारभूत संरचना उपलब्ध कराने की राज्य स्तर पर घोषणा की जाए।

बेंच की स्थापना से सामाजिक न्याय, विधिक समानता एवं त्वरित न्याय की संवैधानिक भावना सुदृढ़ होगी। हमें पूर्ण विश्वास है कि संवेदनशील सरकार हमारी इस न्यायोचित एवं जनहितकारी मांग पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी। जाम की सूचना मिलते ही एडीएम, एएसपी मौके पर पहुंच गए।

अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एडीएम एफआर को सौंपा। इस दौरान चैनसुख गोले, रक्षपाल सिंह, मनु शर्मा, संजीव जिंदल, नवनीत गोला, अजीम अहमद, जितेंद्र विधूड़ी, डॉ. तारीक, हुकम सिंह सैनी, रिजवान उर्फ लालू, फारूक अहमद आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।

वर्षो पुरानी मांग को लेकर फिर हुआ आंदोलन मुखर
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर आंदोलन फिर से मुखर हो गया है। अमरोहा समेत आसपास के जनपदों में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर बुधवार को जगह-जगह बंद का आह्वान पूरी तरह से सफल हुआ।

हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर लगभग 50 साल से लगातार आंदोलन चल रहा है। वर्ष 2022 में जनपद अमरोहा में लगातार छह माह तक लंबा आंदोलन हुआ था। जो केवल आश्वासन पर ही समाप्त हो गया था। अब फिर से यह मांग जोर पकड़ रही है।
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क्यों जरूरी है हाईकोर्ट बेंच
पश्चिमी उत्तर प्रदेश एडवोकेट संघर्ष समिति लंबे समय से हाईकोर्ट बेंच की मांग कर रही है। यह मांग किसी एक वर्ग या जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता से जुड़ी है। अमरोहा, आगरा, मेरठ, संभल और मुरादाबाद जैसे जिलों से प्रयागराज जाकर मुकदमों की पैरवी करना आम लोगों के लिए मुश्किल होता है। इसमें समय और धन दोनों बर्बाद होते हैं, साथ ही यात्रा में कई अन्य परेशानियां भी आती हैं।
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